इन्दौरा: वर्षों से मकान की आस में परिवार, बीपीएल में नाम फिर भी नहीं मिल रहा आशियाना

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इन्दौरा – शम्मी धीमान

प्रदेश सरकार यहां विभिन्न प्रकार की आवास योजनाओं के माध्यम से लोगों को गृह निर्माण और मरम्मत करने के लिए अनुदान देने की बातें कर करती है, लेकिन धरातल पर यह सब योजनाएं ओर घोषणाएं खोखली साबित हो रही है। जिसका ताजा उदारहण विधानसभा क्षेत्र इंदौरा के अधीन पड़ती ग्राम पंचायत बडूखर के गांव डूहग में देखने को मिला है।

यहां एक गरीब परिवार 20 वर्षों से सरकार से पक्के मकान के अनुदान की आस लगाए बैठा है। उस परिवार की आस को आज तक न ही मौजूदा सरकार व न ही स्थानीय पंचायत पूरा कर सकी है। पक्का मकान तो दूर की बात इस परिवार को स्वच्छ भारत मिशन के तहत सरकार और संबंधित विभाग आज तक शौचालय निर्माण के लिए कोई भी अनुदान नहीं दिया है।

बुद्धि सिंह निवासी डूहग ने बताया कि वह मजदूरी करते हैं और मजदूरी कर अपने बच्चों की पढ़ाई करवाएं या फिर मकान बनाए। वर्ष 2011 में उन्हें बीपीएल सूची में शामिल किया गया और उन्हें आस लगी के शायद उन्हें सरकार की आवास योजनाओं का लाभ मिलेगा पर आज तक वो आस ही रही है।

कई बार ब्लॉक इंदौरा सहित कई कार्यालयों के चक्कर काट चुके है और हर महीने कोई न कोई पंचायत का नुमाइंदे घर देखकर जाते है। यहां आकर बोलते है कि बस अब पंचायत में मकान का अनुदान आने का आपका ही पहला नंबर है और 15 दिन में मकान का अनुदान आ जाएगा।

देखते देखते 20 वर्ष गुजर गए पर मकान की स्थिति उसी तरह है। बुद्धि सिंह ने बताया कि हम हर रोज डर डर कर अपने जर्जर मकान में सोते है। स्लेट पोश मकान की हर दीवार जर्जर हो गई है और पूरे मकान में जगह जगह लकड़ी की मोटी मोटी बल्लिया लगाकर मकान को गिरने से बचाया गया है।

बुद्धि सिंह के परिवार में कुल पांच सदस्य में जिनमे एक उनका बेटा ओर दो लड़कियां है। लड़कियों ने बताया कि उन्होंने अपने तीन दुधारु पशु बेचकर शौचालय का निर्माण करवाया पर वो भी अभी अधूरा है, क्योंकि रसोई घर की हालत बहुत ही जर्जर हो चुकी थी। रसोई का सामान शौचालय के लिए बनाई जगह में रखना पड़ा है।

बुद्धि सिंह की बेटियों ने कहा कि उनकी माता कहती है कि उनका जन्म भी नहीं हुआ था जब से हम सरकार से आवास योजना के तहत अनुदान की मांग कर रहे हैं आज दोनों लड़कियों की उम्र बीस बीस बर्ष से ऊपर हो गई है। लड़कियों ने सरकार से अपील करते हुए कहा कि हम कौन सी सरकार से नोकरी मांग रहे है। हम तो सिर्फ सिर छुपाने के लिए एक आशियाना ही मांग रही है। सरकार शायद तभी गहरी नींद से जागेगी जब सारा मकान धराशाही होकर उनके पूरे परिवार के लिए काल का ग्रास बन जाएगा।

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