UPSC परीक्षा में 5वीं रैंक हासिल करने वाले अधिकारी भारतीय सेना में मेजर बने। वर्ष 1982 में उन्होंने राजनीति में कदम रखा और सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की।
शाहपुर – नितिश पठानियां
शाहपुर से पांच बार विधायक तथा दो बार मंत्री रहे मेजर विजय सिंह मनकोटिया का आज मंगलवार सुबह निधन हो गया। उन्होंने अपने पैतृक गांव त्यारा में अंतिम सांस ली। उनका निधन हार्ट अटैक के कारण हुआ है।
कांगड़ा से विधायक पवन काजल, शाहपुर से पूर्व विधायक सरवीन चौधरी, मंत्री चौधरी चंद्र कुमार, विधायक भवानी पठानिया, विधायक रणवीर सिंह निका, विधायक केवल सिंह पठानिया, पूर्व विधायक नीरज भारती, पूर्व विधायक अजय महाजन, पूर्व मंत्री राकेश पठानिया, भाजपा नेता संजय गुलेरिया, पूर्व विधायक डॉक्टर हरबंस राणा, पूर्व विधायक अर्जुन सिंह ने मेजर विजय सिंह मनकोटिया के निधन पर शोक जताया है। उन्होंने कहा कि कांगड़ा जिलद्म ने एक अनुभवी और ईमानदार नेता खो दिया है।
विधायक के रूप में कार्यकाल
मेजर विजय सिंह मनकोटिया पांच बार विधायक बने। हमेशा ही जनता की आवाज को बुलंद करते थे। जनता भी उनको निर्भीक नेता के रूप में पसंद करती थी।
- 1982 से 1985—निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में पहली बार विधायक बने।
- 1985 से 1990—कांग्रेस के टिकट पर दूसरी बार विधायक बने।
- 1990 से 1992—जनता दल के टिकट पर तीसरी बार विधानसभा पहुंचे।
- 1993 से 1998—कांग्रेस के टिकट पर चौथी बार विधायक चुने गए।
- 2003 से 2007—कांग्रेस के टिकट पर पांचवीं बार विधायक बने।
मंत्री के रूप में कार्यकाल
उन्होंने अपने राजनीतिक करियर के दौरान दो बार कैबिनेट मंत्री की जिम्मेदारी संभाली। पहली बार 1993 में वीरभद्र सिंह सरकार में पर्यटन और नागरिक उड्डयन मंत्री बने थे। इसके बाद 1995 में भी उन्हें वीरभद्र सिंह की कैबिनेट में शामिल किया गया था, जहां उन्होंने पर्यटन, नागरिक उड्डयन और कानून जैसे महत्वपूर्ण विभाग संभाले।
1982 में राजनीति में कदम रखा
भारतीय सेना के पूर्व मेजर और हिमाचल प्रदेश के वरिष्ठ राजनीतिज्ञ मेजर विजय सिंह मनकोटिया का जन्म वर्ष 1939 में कांगड़ा घाटी के तियारा गांव में हुआ था। राजनीति में आने से पहले वह भारतीय सेना में मेजर के पद पर कार्यरत थे। वह एक प्रतिष्ठित सैन्य परिवार से ताल्लुक रखते थे। वर्ष 1959 में यूपीएससी की परीक्षा उत्तीर्ण की तथा अखिल भारतीय मैरिट सूची में पांचवां स्थान हासिल किया।
वर्ष 1960 में देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी में शामिल हो गए। 1962 में स्नातक होने पर उन्होंने प्रतिष्ठित स्वार्ड ऑफ ऑनर, स्वर्ण पदक हासिल किया। 1/1 गोरखा राइफल में कमीशन प्राप्त करने के बाद उन्होंने अपने सैन्य करियर में 1962 के भारत चीन युद्ध, 1965 के भारत पाकिस्तान संघर्ष और 1971 के बांग्लादेश मुक्ति युद्ध में सक्रिय रूप में सेवा की।
वर्ष 1976 में समय से पहले सेवानिवृत्ति ले ली। वर्ष 1982 में उन्होंने राजनीति में अपना कदम रखा। वह पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय वीरभद्र सिंह के धुर विरोधी माने जाते थे। मई 2007 को मेजर विजय सिंह मनकोटिया ने एक सीडी जारी की थी, जिसने हिमाचल की सियासत में भूचाल ला दिया था।



