टांडा अस्पताल में पार्किंग के नाम पर हो रही मनमानी वसूली पर रोक लगाई गई है। अब टू-व्हीलर के लिए ₹5 और फोर-व्हीलर के लिए ₹10 शुल्क निर्धारित किया गया है। इससे अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों और तीमारदारों को राहत मिलने की उम्मीद है।
काँगड़ा – राजीव जस्वाल
डॉ. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज टांडा की पार्किंग में मनमाने शुल्क और उपभोक्ता अधिकारों के उल्लंघन पर जिला उपभोक्ता विवाद आयोग कांगड़ा स्थित धर्मशाला ने कड़ा फैसला सुनाया है। आयोग ने टांडा के चिकित्सा अधीक्षक और प्रिंसीपल को 20 लाख रुपए जिला रेडक्रॉस सोसायटी कांगड़ा में जमा करवाने, पार्किंग ठेकेदार को दो लाख रुपए पुलिस अधीक्षक कांगड़ा के पास जमा करवाने के आदेश दिए हैं।
यह राशि यातायात नियमों के पालन, महाविद्यालय के विद्यार्थियों में यातायात जागरूकता और हेलमेट वितरण जैसे कार्यों पर खर्च होगी। इसके अलावा सभी विपक्षी पक्षों को संयुक्त रूप से 25 हजार रुपए जिला उपभोक्ता विधिक सहायता कोष में जमा करने, शिकायतकर्ता को पांच हजार रुपए मुआवजा और 10 हजार रुपए मुकदमा खर्च देने के आदेश दिए गए हैं।
निर्धारित समय में राशि जमा न करने पर नौ प्रतिशत ब्याज भी देना होगा। आयोग के अध्यक्ष हेमांशु मिश्रा, सदस्य आरती सूद और नारायण ठाकुर की पीठ ने शुक्रवार को यह फैसला सुनाया। आदेश के अनुसार 14 सितंबर, 2026 यानी सोमवार से दोपहिया वाहनों से चार घंटे तक पांच रुपए और इसके बाद 10 रुपए तथा चौपहिया वाहनों से चार घंटे तक 10 रुपए और इसके बाद 20 रुपए ही लिए जा सकेंगे।
पार्किंग में स्पष्ट दर-पट्ट लगाने, इलेक्ट्रॉनिक रसीद जारी करने और वाहन के प्रवेश-निकास का समय दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं। मामला ज्वालामुखी निवासी अभिषेक शर्मा की शिकायत से जुड़ा है।
शिकायतकर्ता 10 जून, 2026 को उपचाराधीन रिश्तेदार के साथ टांडा अस्पताल पहुंचे थे। उन्होंने अपनी कार पार्किंग में खड़ी की। वहां चौपहिया वाहन के लिए 20 रुपए प्रति घंटा शुल्क प्रदर्शित था। दो घंटे से कम समय के लिए 40 रुपए बनते थे, लेकिन उनसे 50 रुपए वसूले गए। विरोध करने पर वाहन रोकने और दुव्र्यवहार का आरोप भी लगाया गया था।
आयोग ने पाया कि 14 सितंबर, 2021 को पार्किंग शुल्क बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया था, लेकिन प्रस्तावित दरों को विधिवत मंजूरी नहीं मिली थी। इसके बावजूद अधिक शुल्क वसूला गया। आयोग ने इसे उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन, सेवा में गंभीर कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार माना।
आयोग ने दो माह के भीतर पार्किंग को पक्का करने, उचित रेखांकन और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करवाने तथा रास्ते में लगाए गए अवरोधक हटाने को कहा है। रक्तदाताओं, लंगर सेवा वाहनों, एंबुलेंस और चिकित्सा महाविद्यालय के निर्माण कार्य से जुड़े वाहनों से पार्किंग शुल्क नहीं लिया जाएगा।
भविष्य में पार्किंग शुल्क बढ़ाने से पहले सामाजिक-आर्थिक प्रभाव, पार्किंग क्षमता, उपयोग और आसपास की दरों का अध्ययन कर सक्षम स्तर से मंजूरी लेना अनिवार्य होगा।

