धर्मशाला में 19 करोड़ से बनेगा हिमाचल का पहला रिमोट सेंसिंग केंद्र: चंद्र कुमार

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कृषि एवं पशुपालन मंत्री चंद्र कुमार ने स्वतंत्रता दिवस पर धर्मशाला में ध्वजारोहण किया। उन्होंने बताया कि धर्मशाला में 19 करोड़ रुपये की लागत से प्रदेश का पहला रिमोट सेंसिंग केंद्र स्थापित किया जाएगा।

धर्मशाला, 15 अगस्त – हिमखबर डेस्क

कृषि एवं पशुपालन मंत्री प्रो. चंद्र कुमार ने आज धर्मशाला के पुलिस मैदान में आयोजित जिला स्तरीय स्वतंत्रता दिवस समारोह में राष्ट्रीय ध्वज फहराया तथा परेड का निरीक्षण कर मार्च पास्ट की सलामी ली। इससे पूर्व उन्होंने शहीद स्मारक पहुंचकर देश की आजादी के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की।

समारोह को संबोधित करते हुए कृषि एवं पशुपालन मंत्री ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस केवल राष्ट्रीय पर्व ही नहीं, बल्कि उन महान स्वतंत्रता सेनानियों और वीर सैनिकों के त्याग, तपस्या और बलिदान को स्मरण करने का अवसर भी है, जिनके संघर्ष और बलिदान से देश को आजादी मिली।

उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश देवभूमि के साथ-साथ वीरभूमि भी है। प्रदेश के वीर जवानों ने देश की सीमाओं की रक्षा के लिए अदम्य साहस, पराक्रम और सर्वोच्च बलिदान की गौरवशाली परंपरा कायम की है। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद देश के सामने खाद्य सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य तथा आर्थिक एवं सामाजिक विकास जैसी अनेक चुनौतियां थीं। देश ने इन क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है और आज भारत विश्व की तेजी से उभरती अर्थव्यवस्थाओं में अपनी मजबूत पहचान बना रहा है।

प्रो. चंद्र कुमार ने कहा कि प्रदेश सरकार भी इसी भावना के साथ लोगों की सेवा करने और विकास योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था में कृषि और बागवानी का महत्वपूर्ण योगदान है तथा ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में परिवार प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कृषि पर निर्भर हैं। ऐसे में किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करना सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है।

उन्होंने कहा कि हरित क्रांति के दौर में रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक इस्तेमाल से कृषि उत्पादन में वृद्धि हुई, लेकिन दीर्घकाल में इसका मिट्टी की उर्वरता और प्राकृतिक संसाधनों पर प्रतिकूल प्रभाव भी पड़ा। आज ऐसी कृषि व्यवस्था की आवश्यकता है, जिसमें उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ मिट्टी, जल और पर्यावरण का संरक्षण भी सुनिश्चित हो।

कृषि मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए निरंतर कदम उठा रही है। प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए राजीव गांधी प्राकृतिक खेती स्टार्ट-अप योजना शुरू की गई है। प्राकृतिक खेती से उत्पादित गेहूं का समर्थन मूल्य बढ़ाकर 80 रुपये प्रति किलोग्राम, मक्की का समर्थन मूल्य 50 रुपये तथा कच्ची हल्दी का समर्थन मूल्य 150 रुपये प्रति किलोग्राम किया गया है।

उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में कृषि क्षेत्र को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। धर्मशाला में करीब 19 करोड़ रुपये की लागत से राज्य का पहला रिमोट सेंसिंग एवं डेमोग्राफिक इन्फाॅर्मेशन सिस्टम केंद्र स्थापित किया जाएगा, जिसे केंद्र सरकार के सहयोग से विकसित किया जाएगा।

इस हाईटेक केंद्र के माध्यम से मौसम, भूमि, फसल और प्राकृतिक संसाधनों से संबंधित डिजिटल डेटा तैयार कर विभिन्न सरकारी विभागों को उपलब्ध करवाया जाएगा। इससे किसानों को समय पर वैज्ञानिक सलाह उपलब्ध करवाने में मदद मिलेगी तथा विभागीय कार्यप्रणाली अधिक प्रभावी, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनेगी।

कृषि एवं पशुपालन मंत्री ने कहा कि कृषि के साथ पशुपालन को बढ़ावा देकर ग्रामीण परिवारों की आय में वृद्धि की जा सकती है। प्रदेश सरकार किसानों और पशुपालकों से दूध की खरीद को बढ़ावा देने, दुग्ध प्रसंस्करण सुविधाओं के विस्तार तथा दूध से विभिन्न मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार करने की दिशा में कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि गाय के दूध का खरीद मूल्य 61 रुपये प्रति लीटर और भैंस के दूध का खरीद मूल्य 71 रुपये प्रति लीटर किया गया है।

उन्होंने कहा कि कांगड़ा जिला के ढगवार में 250 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक दुग्ध संयंत्र स्थापित किया जा रहा है। इस संयंत्र में विभिन्न दुग्ध आधारित उत्पाद तैयार किए जाएंगे। दुग्ध क्षेत्र को संगठित और आधुनिक बनाने से किसानों को नियमित आय का स्रोत उपलब्ध होगा तथा पनीर, दही, घी सहित विभिन्न मूल्यवर्धित उत्पादों के बेहतर विपणन से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि कृषि और पशुपालन को केवल पारंपरिक गतिविधियों तक सीमित न रखा जाए, बल्कि इन्हें आधुनिक तकनीक, प्रसंस्करण, ब्रांडिंग और बाजार से जोड़ा जाए। इससे किसानों की आय में स्थायी वृद्धि सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
प्रो. चंद्र कुमार ने कहा कि फल उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश के सात जिलों में एचपी शिवा परियोजना कार्यान्वित की जा रही है।

परियोजना के प्रथम चरण के लिए निर्धारित 3,000 हेक्टेयर लक्ष्य में से 2,612 हेक्टेयर क्षेत्र विकसित किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रदेश के विकास का आधार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा है। प्रदेश सरकार ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में शिक्षा सुविधाओं को मजबूत करने के साथ विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध करवाने के लिए प्रयासरत है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में पहली बार सीबीएसई स्कूल शुरू करने की पहल की गई है। इसका उद्देश्य बच्चों को घर के नजदीक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध करवाना है। प्रदेश के 156 सरकारी स्कूलों में सीबीएसई पैटर्न लागू किया गया है, जिससे इन विद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या में वृद्धि हुई है।

कृषि मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण पर विशेष ध्यान दे रही है। अस्पतालों में आवश्यक सुविधाओं, चिकित्सा उपकरणों और मानव संसाधन को मजबूत करने के साथ लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाने के प्रयास किए जा रहे हैं। प्रदेश में पहली बार रोबोटिक सर्जरी की सुविधा शुरू की गई है।

डाॅ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय आयुर्विज्ञान महाविद्यालय टांडा सहित आईजीएमसी शिमला, नेरचैक मेडिकल काॅलेज और चमियाणा अस्पताल में यह सुविधा उपलब्ध है। आधुनिक चिकित्सा मशीनरी और उपकरणों की खरीद पर लगभग 3 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।

कृषि मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार कर्मचारियों और समाज के विभिन्न वर्गों के हितों को ध्यान में रखते हुए अनेक महत्वपूर्ण निर्णय ले रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के विकास में सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों का बहुमूल्य योगदान है तथा सरकार उनके हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि सरकार ने कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना का लाभ दिया है और उनके अन्य हितों का भी ध्यान रखा जा रहा है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश के युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए सरकार कड़े कदम उठा रही है। प्रदेशवासियों के सहयोग से ‘चिट्टा-मुक्त हिमाचल अभियान’ शुरू किया गया है और नशे के खिलाफ जनभागीदारी को और मजबूत किया जा रहा है।

प्रो. चंद्र कुमार ने युवाओं का आह्वान किया कि वे स्वतंत्रता सेनानियों और शहीदों के जीवन से प्रेरणा लें तथा देश और प्रदेश के विकास में अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि युवा देश की सबसे बड़ी शक्ति हैं और उनके ज्ञान, कौशल तथा ऊर्जा का सकारात्मक उपयोग राष्ट्र निर्माण के लिए आवश्यक है।

समारोह के दौरान विभिन्न टुकड़ियों ने आकर्षक मार्च पास्ट प्रस्तुत किया जबकि सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए जबकि रैडक्राॅस के रैफल ड्राॅ भी निकाले गए। समारोह के दौरान विभिन्न सामाजिक संस्थाओं की ओर से जरूरतमंद एवं पात्र लोगों को सहायक उपकरण भी प्रदान किए गए। इस अवसर पर स्वतंत्रता सेनानियों एवं शहीदों के परिजनों को सम्मानित भी किया गया।

ये रहे उपस्तिथ

समारोह में पालमपुर के विधायक आशीष बुटेल, प्रदेश ओबीसी निगम के अध्यक्ष प्रभात चैधरी, एपीएमसी अध्यक्ष निशु मोंगरा, एससी आयोग के सदस्य दिग्विजय मल्होत्रा एवं शालिनी, बाल कल्याण समिति कांगड़ा के अध्यक्ष विक्रम शर्मा, उपायुक्त हेमराज बैरवा, पुलिस अधीक्षक कुलभूषण वर्मा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी, स्वतंत्रता सेनानी एवं सैनिक परिवारों के सदस्य, गणमान्य नागरिक, विद्यार्थी तथा बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित रहे।

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