हिमाचल के प्रसिद्ध बिजली महादेव मंदिर क्षेत्र में बड़ी मात्रा में कचरा और करीब 600 शराब की बोतलें मिलने से मंदिर की पवित्रता और सफाई व्यवस्था पर सवाल उठे हैं। करीब 12 क्विंटल कचरा हटाया गया।
हिमखबर डेस्क
यहां-वहां बिखरा कचरा, पॉलीथीन और चिप्स के पैकेट…साथ ही बिखरी पड़ी शराब की खाली बोतलें। यह दृश्य हिमाचल प्रदेश में किसी पर्यटन स्थल का नहीं बल्कि कुल्लू जिले में स्थित बिजली महादेव मंदिर के परिसर का है।
मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र होते हैं लेकिन बिजली महादेव मंदिर की तस्वीर बताती है कि धार्मिक पर्यटन की आड़ में आस्था से किस तरह खिलवाड़ किया जा रहा है। आस्था का यह केंद्र शराबियों का अड्डा बनता जा रहा है।
हर कहीं कचरा फैलाकर पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचाने से कोई कसर बाकी नहीं रखी जा रही है। मंडी जिले की पराशर ऋषि स्वच्छता सेना ने 24 व 25 अगस्त को मंदिर परिसर में स्वच्छता अभियान चलाकर 12 क्विंटल कचरा एकत्र किया।मंदिर के 50 मीटर दायरे में शराब की 600 से अधिक खाली बोतलें मिलीं। संस्था को कचरे के निस्तारण के लिए कुल्लू जिले में जगह ही नहीं मिली और इसे मंडी लाना पड़ा।
पराशर ऋषि स्वच्छता सेना मंडी व कुल्लू जिलों के धार्मिक स्थानों पर सफाई अभियान चलाती है। बिजली महादेव में भी 15 लोगों की टीम सफाई के लिए गई थी। स्वच्छता सेना का नेतृत्व करने वाले धूमल ठाकुर ने बताया कि मंदिर परिसर में शराब की खाली बोतलें मिलना चिंताजनक है।
उन्होंने मंदिर कमेटी और जिला प्रशासन से कदम उठाने की मांग की ताकि धार्मिक स्थलों की मर्यादा को कायम रखा जा सके। मंदिर के पुजारी मदन ने बताया कि बिजली महादेव मंदिर में समय-समय पर मंदिर कमेटी और स्वयंसेवियों के द्वारा सफाई की जाती है।
यह है मान्यता?
मान्यता के अनुसार बिजली महादेव लोगों के कष्ट हरने के लिए आकाशीय बिजली को खुद पर ले लेते हैं। 12 वर्ष में एक बार मंदिर पर बिजली गिरती है, जिससे शिवलिंग खंडित हो जाता है। पुजारी शिवलिंग के टुकड़ों को एकत्र करता है।
इन्हें जोड़ने के लिए बिजली महादेव के हरियान क्षेत्र यानी बिजली महादेव के अधीन आने वाले गांवों के लोगों से मक्खन एकत्र किया जाता है। शिवलिंग के टुकड़ों को एकत्र कर इस पर मक्खन का लेप लगाया जाता है, जिससे शिवलिंग जुड़ जाता है। मई 2025 में बिजली गिरने से शिवलिंग खंडित हुआ था।
बिजली महादेव मंदिर
कुल्लू जिले की खराहल घाटी में समुद्र तल से 2460 मीटर की ऊंचाई पर बिजली महादेव मंदिर है। मंदिर तक पहुंचने के लिए कुल्लू से 14 किलोमीटर दूर स्थित चंसारी गांव से तीन किलोमीटर ट्रैकिंग करनी पड़ती है। बिजली महादेव को कुल्लू घाटी के रखवाला के रूप में पूजा जाता है।
यह मंदिर वर्ष में नौ माह तक श्रद्धालुओं के लिए खुला रहता है। तीन माह 15 दिसंबर से 15 मार्च तक मंदिर बंद रहता है। मान्यता है कि इस दौरान देवता तपस्या में लीन रहते हैं, इसलिए शोर शराबा नहीं करना चाहिए।

