सुख-आश्रय योजना से बदली अनाथ बच्चों की जिंदगी, जेब खर्च, पढ़ाई और अपना घर देने की पहल

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अनाथ व बेसहारा को जेब खर्चपढ़ाई और अपना घर भीमुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना से हुआ संभव, करसोग उपमंडल के 23 लाभार्थियों को घर बनाने के लिए तीन लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता

करसोग – हिमखबर डेस्क

जीवन में माता-पिता का साया उठ जाना किसी भी बच्चे के लिए सबसे बड़ा दुःख होता है। ऐसे बच्चों के सामने शिक्षा, पालन-पोषण, आर्थिक सुरक्षा और भविष्य की चिंता एक साथ खड़ी हो जाती है। लेकिन, राज्य सरकार की मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना ने ऐसे बच्चों के जीवन में नई उम्मीद जगाई है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में शुरू की गई यह योजना आज हजारों बच्चों के लिए केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि परिवार रूपी सहारा बनकर उनके जीवन को नई दिशा दे रही है।

मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना के माध्यम से प्रदेश सरकार अनाथ एवं बेसहारा बच्चों की शिक्षा, उच्च अध्ययन, जेब खर्च, कौशल विकास तथा आत्मनिर्भर भविष्य की जिम्मेदारी निभा रही है। इतना ही नहीं, जिनके पास अपना घर नहीं है, उन्हें सरकार घर निर्माण के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध करवा रही है, ताकि वे सम्मानपूर्वक जीवन जी सकें।

करसोग उपमंडल में योजना के अंतर्गत 23 पात्र लाभार्थियों को अपने घर के निर्माण के लिए कुल तीन लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। यह राशि 4 किस्तों में दी जाती है। उपमंडल के सभी पात्र लाभार्थियों को घर बनाने के दो किस्त प्रदान कर दी गई हैं। यह आर्थिक सहायता केवल मात्र ईंट और सीमेंट का खर्च नहीं, बल्कि उन बच्चों के सपनों की मजबूत नींव है, जिन्होंने कभी अपना घर होने की कल्पना भी दूर की कौड़ी लगती थी।

घर बनाने के लिए आर्थिक सहायता पाने वालों में चमन लाल, बॉवी, पीताम्बर, उत्तम चंद, पूनम शर्मा, अनु कुमारी, देशराज, मनीष खन्ना, भूपेंद्र कुमार, राजेंद्र, जगदीश, मोनिका, बृज लाल, सुनील दत्त, दिनेश कुमार, संजीव कुमार, संजय कुमार, पुष्पराज, दिनेश, यशवंत, हिम चंद, मनीष कुमार, ललित कुमार शामिल हैं।

लाभार्थी मनीष कुमार ने बताया कि पहले लगता था कि हमारा भविष्य अंधकारमय है। लेकिन, राज्य सरकार की सुख-आश्रय योजना ने पढ़ाई की चिंता दूर की, जेब खर्च दिया और अब अपना घर बनाने में भी सहायता दी है। अब हमें महसूस होता है कि हम अकेले नहीं हैं। इस योजना को लाने के लिए हम मुख्यमंत्री और “सुक्खू सरकार” के सदैव आभारी रहेंगे।

लाभार्थी संजय कुमार ने बताया कि सोचा नहीं था कि हमारा भी अपना घर होगा। सुख-आश्रय योजना ने हमारे जीवन में नई उम्मीद जगाई है। इस योजना को शुरू करने के लिए हम राज्य सरकार के धन्यवादी हैं।

पिताम्बर सहित अन्य लाभार्थियों ने बताया कि राज्य सरकार ने उन्हें केवल आर्थिक सहायता ही नहीं दी, बल्कि परिवार जैसा अपनापन भी दिया है। शिक्षा, जेब खर्च और घर निर्माण की सुविधा मिलने से अब वे आत्मविश्वास के साथ अपने उज्ज्वल भविष्य की ओर बढ़ रहे हैं।

उन्होंने मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू और प्रदेश सरकार का आभार व्यक्त करते हुए कहा, यह योजना हमारे लिए किसी वरदान से कम नहीं है। सरकार ने हमारे जीवन में खुशियां लौटाई हैं। हमें पढ़ने, आगे बढ़ने और सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अवसर मिला है। इसके लिए हम मुख्यमंत्री और प्रदेश सरकार का हृदय से धन्यवाद करते हैं। हम मेहनत से पढ़ाई करेंगे, आत्मनिर्भर बनेंगे और समाज के जिम्मेदार नागरिक के रूप में अपनी पहचान बनाएंगे।

मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना समाज के सबसे जरूरतमंद बेसहारा व अनाथ बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है। राज्य सरकार इन बच्चों के लिए अभिभावक की भूमिका निभा रही है। शिक्षा से लेकर जेब खर्च, उच्च शिक्षा और घर निर्माण तक हर स्तर पर सहायता उपलब्ध करवाई जा रही है, ताकि कोई भी बच्चा संसाधनों के अभाव में अपने सपनों से समझौता न करे। करसोग उपमंडल में योजना का प्रभाव धरातल पर दिखाई दे रहा है और लाभार्थियों के जीवन में आत्मविश्वास तथा सुरक्षा की भावना बढ़ी है।

मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना आज यह संदेश दे रही है कि संवेदनशील शासन केवल योजनाएं नहीं बनाता, बल्कि जरूरतमंदों के जीवन में वास्तविक परिवर्तन भी लाता है। करसोग में योजना के सकारात्मक परिणाम इस बात का प्रमाण हैं कि जब सरकार अभिभावक बनकर साथ खड़ी होती है, तब कठिन परिस्थितियों में भी बच्चों के सपनों को नई उड़ान मिलती है। यह योजना न केवल उनका वर्तमान सुरक्षित कर रही है, बल्कि उनके भविष्य को भी आत्मविश्वास, सम्मान और नई संभावनाओं से भर रही है।

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