हिमख़बर डेस्क
जनपद के बल्ह क्षेत्र के शिवकोटि गांव निवासी एक पिता ने अपने मासूम बच्चे के इलाज के दौरान कथित चिकित्सकीय लापरवाही का गंभीर आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री से न्याय की गुहार लगाई है।
परिजनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच करवाने की मांग की है। परिजनों के अनुसार, बच्चे का एक टेस्टिकल पेट (एब्डॉमिनल) में था।
जांच के बाद चिकित्सकों ने उसे शिमला स्थित इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (IGMC) में ऑपरेशन करवाने की सलाह दी।
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 30 मार्च को बच्चे की सर्जरी की गई, लेकिन ऑपरेशन के दौरान अचानक उसकी हालत गंभीर हो गई।
परिजनों का आरोप है कि सर्जरी के बाद बच्चे को लंबे समय तक होश नहीं आया और उसे वेंटिलेटर पर ICU में भर्ती करना पड़ा।
परिजनों का कहना है कि बाद में उन्हें बताया गया कि बच्चे को हाइपॉक्सिक ब्रेन इंजरी हुई है। उनका आरोप है कि ऑपरेशन के दौरान और उसके बाद बच्चे को कई बार CPR भी देना पड़ा।
परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि घटना के बाद उन्हें बच्चे की स्वास्थ्य स्थिति के बारे में स्पष्ट और संतोषजनक जानकारी नहीं दी गई।
पीड़ित परिवार के मुताबिक, उन्होंने मामले को लेकर पुलिस में शिकायत देने का प्रयास किया, लेकिन उन्हें अपेक्षित कार्रवाई नहीं मिली।
परिजनों का दावा है कि इलाज के दौरान कई बार डॉक्टरों और अस्पताल के स्टाफ के साथ उनकी बहस भी हुई।परिवार ने कथित चिकित्सकीय लापरवाही से संबंधित कुछ वीडियो और ऑडियो रिकॉर्डिंग भी सुरक्षित होने की बात कही है।
परिजनों के अनुसार, 7 अप्रैल को बच्चे की ट्रेकियोस्टॉमी की गई। इसके बाद उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे IGMC से PGI चंडीगढ़ रेफर किया गया।
PGI में कुछ दिन उपचार के बाद बच्चे को AIIMS रेफर किया गया, जहां वर्तमान में उसका इलाज चल रहा है।
परिवार का कहना है कि बच्चा पिछले कई महीनों से बिस्तर पर है और उसकी हालत ने पूरे परिवार को मानसिक एवं भावनात्मक रूप से झकझोर दिया है।
पीड़ित पिता ने मुख्यमंत्री से मामले की निष्पक्ष, स्वतंत्र और उच्चस्तरीय जांच करवाकर जिम्मेदारी तय करने तथा परिवार को न्याय दिलाने की मांग की है।

