जया हो या हेमा, साक्षी हो या सुषमा…सबकी पसंद बनी हिमाचल में यूरोप से आई यह कला

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हिमखबर डेस्क 

समय के साथ भुला दी गई क्रोशिया कला अब नए ट्रेंड और आधुनिक डिजाइनों के साथ फिर से बाजार में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा रही है।

आज के दौर में भले ही मशीनों से बने उत्पादों का चलन बढ़ा है, लेकिन हाथों से तैयार किए गए क्रोशिया उत्पादों की खूबसूरती और मजबूती ने लोगों को फिर आकर्षित करना शुरू कर दिया है।

आज क्रोशिया से बनी हेयर पिन, हेयर बैंड, कीरिंग, फूल, बैग, पर्स, मोबाइल पाउच और सजावटी सामान युवाओं की पहली पसंद बन रहे हैं।

बता दें कि देश में क्रोशिया का प्रचलन ब्रिटिश काल के दौरान यूरोप से आया माना जाता है। धीरे-धीरे यह कला देश के विभिन्न राज्यों में फैल गई और ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं ने इसे अपनाकर अपने परिवार की आय का साधन बनाया।

पहले गांव की महिलाएं खाली समय में ऊन और धागे से बच्चों के स्वेटर, टोपी, मोजे, मेजपोश, तकिये के कवर और सजावटी वस्तुएं तैयार करती थीं।

समय बदलने के साथ यह कला कुछ वर्षों तक सीमित हो गई, लेकिन अब सोशल मीडिया और ऑनलाइन बाजार के कारण क्रोशिया फिर से ट्रेंड में लौट आया है।

प्रदेश के सोलन, शिमला, सिरमौर, मंडी, कांगड़ा, कुल्लू, हमीरपुर, बिलासपुर और ऊना जिलों में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं क्रोशिया उत्पाद तैयार कर रही हैं।

मेले, प्रदर्शनियों और स्थानीय बाजारों के साथ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी इन हस्तनिर्मित हेयर बैंड, कीरिंग, बैग व सजावटी वस्तुओं की मांग लगातार बढ़ रही है।

जिला कांगड़ा में भी स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं इस पारंपरिक कला को नए डिजाइन और आधुनिक जरूरतों के अनुसार ढाल रही हैं।

हाथ से बने उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है, जिससे महिलाओं को बेहतर आमदनी के अवसर मिल रहे हैं। कई महिलाएं घर बैठे ही ऑर्डर लेकर सामान तैयार कर रही हैं।

फैशन और होम डेकोर का दौर

आज क्रोशिया से केवल पारंपरिक वस्तुएं ही नहीं, बल्कि फैशन और होम डेकोर से जुड़े अनेक उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं।

इनमें हेयर क्लिप, स्क्रंची, हेयर बैंड, कीरिंग, बुके, गुलाब और ट्यूलिप के फूल, पूजा की थाली सजावट, भगवान की पोशाक, राखियां, बुकमार्क, ड्रीम कैचर, कॉफी कोस्टर, टेबल रनर, प्लांट हैंगर, हैंडबैग, स्लिंग बैग, वॉलेट, मोबाइल कवर, लैपटॉप स्लीव, बच्चों के खिलौने, गुडिय़ा, टेडी, बेबी बूटीज, टोपी, शॉल, कुशन कवर और दीवारों की सजावट जैसी अनेक वस्तुएं शामिल हैं।

ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी

शाहपुर की अनीता, सुषमा, संगीता, रजनी, साक्षी, जया, हेमा, कमला, रानी, सरिता, श्वेता, अरुणा, प्रियंका ने बताया कि पर्यावरण के प्रति बढ़ती जागरूकता के चलते लोग अब हस्तनिर्मित और टिकाऊ उत्पादों को अधिक पसंद कर रहे हैं।

यही कारण है कि क्रोशिया से बने उत्पादों की मांग स्थानीय बाजार के साथ-साथ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी तेजी से बढ़ रही है।

इसके इलावा स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं का कहना है कि यदि उन्हें नियमित प्रशिक्षण, आधुनिक डिजाइन और बेहतर विपणन की सुविधा मिले, तो क्रोशिया उत्पाद राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अपनी अलग पहचान बना सकते हैं।

पर्यटकों की पहली पसंद

स्वयं सहायता समूह की प्रदर्शनी को देखने पहुंचे पर्यटकों ने बताया कि हाथों से तैयार किए गए क्रोशिया उत्पाद अपनी सुंदरता, बारीक कारीगरी और पारंपरिक पहचान के कारण बेहद आकर्षक लगते हैं।

उन्होंने कहा मशीन से बने सामान की तुलना में हस्तनिर्मित वस्तुओं का अलग ही महत्व होता है। हेयर बैंड, कीरिंग, बैग, फूल और सजावटी वस्तुएं न केवल उपयोगी हैं, बल्कि उपहार के रूप में भी पसंद की जा रही हैं।

पर्यटकों ने कहा कि ऐसे स्थानीय उत्पादों की खरीद से महिलाओं को रोजगार मिलता है और प्रदेश की पारंपरिक हस्तकला को नई पहचान मिलती है।

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