हिमखबर डेस्क
हिमाचल का पागल पत्थर अब खूंखार हो चुका है। खून के प्यासे इस पत्थर के मुंह इनसानी खून लग चुका है। यह पत्थर इतना क्रूर हो चुका है कि अब नन्हे बच्चों को भी नहीं बख्श रहा है।
हिमाचल में बरसात आते ही अनचाही मौतों का सिलसिला शुरू हो जाता है। यह मौतें ऐसी हैं, जिसके बारे में कल्पना भी नहीं की जा सकती। पहाड़ से गिरने वाले यह पत्थर हंसते-खेलते परिवारों को उजाड़ रहे हैं।
बरसात में अब तक हिमाचल में 18 लोगों की मौत पहाड़ से पत्थर गिरने के कारण हो चुकी है। काल का ग्रास बने ये लोग या तो धार्मिक यात्रा पर थे या फिर रोज की तरह अपनी ड्यूटी या निजी काम से जा रहे थे।
शुक्रवार को लाहुल-स्पीति के कडूनाला में हुए दर्दनाक हादसे ने पहाड़ी क्षेत्रों में सफर के जोखिम को एक बार फिर उजागर किया है। उदयपुर-किलाड़ मार्ग गुरुवार से बंद था, जिस कारण कुल्लू से पांगी जा रहे यात्री तिंदी में ही रुकने को मजबूर हो गए थे।
शायद कुदरत ने उन्हें पहले ही आगाह कर दिया था कि यह रास्ता जिंदगी का आखिरी रास्ता भी हो सकता है। खैर, शक्रवार सुबह सडक़ बहाल हुई, तो सभी ने चैन की गहरी सांस ली और पकड़ ली घर जाने वाली टैक्सी।
होनी को कुछ और ही मंजूर था। टैक्सी में एक छह महीने के मासूम बच्चे के साथ 13 लोग कुछ दूर निकले ही थे कि कडूनाला के पास ‘हिमाचल का पागल पत्थर’ क्रूरता दिखाता हुआ उन पर ऐसा झपटा कि आह तक नहीं निकलने दी।
पहाड़ी का बड़ा हिस्सा सीधे टैक्सी पर आ गिरा और देखते ही देखते मासूम बच्चे सहित 13 लोग यह दुनिया छोडक़र चले गए। मंजर इतना खौफनाक था कि बचाव दल की आंखों से भी आंसू निकल पड़े।
घायल लोगों को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने बचाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया, लेकिन पागल पत्थर की क्रूरता के आगे सब खत्म हो गया।
हादसे ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में सडक़ बहाल होने के बाद भी आवाजाही कितनी जोखिम भरी है।
मंदिर जा रही थी सोमेश्वरी, गुम्मा में मौत
कुल्लू के सुल्तानपुर की सोमेश्वरी तो मां सिमसा देवी के मंदिर जा रही थी, पर ‘हिमाचल का पागल पत्थर’ तो राष्ट्रीय उच्च मार्ग-154 पर गुम्मा के पास घात लगाए बैठा था।
हंसता-खेलता यह परिवार गुम्मा के पास सडक़ किनारे बह रहे शीतल जल को पीने के लिए रुका। इसी दौरान पहाड़ी से अचानक एक बड़ी चट्टान गिरी, जिसकी चपेट में सोमेश्वरी देवी आ गई।
औट में नालागढ़ की महिला की मौत
हाल ही में औट के संदली में हिमाचल का पागल पत्थर नालागढ़ की महिला पर मौत बनकर बरसा। सुखबीर कौर (38) निवासी नालागढ़ अपने पति जसविंदर सिंह और बच्चे के साथ कार से मणिकर्ण जा रही थी।
औट के संदली में महिला की तबीयत अचानक बिगड़ गई। महिला बच्चे को साथ लेकर जैसे ही कार से उतरी, तभी पहाड़ी से एक भारी-भरकम पत्थर तेजी से लुढक़ता हुआ आया और सीधे महिला के सिर पर जा गिरा, जिससे उसकी मौत हो गई।
धांधल नाला में कंडक्टर की मौत
लाहुल घाटी के करपट इलाके में 2 जुलाई को धांधल नाले के पास एचआरटीसी कंडक्टर मंडी निवासी ज्ञान सिंह सुबह सवा सात बजे के करीब हाथ-मुंह धो रहा था। तभी अचानक ऊपर से पत्थर उन पर गिर गया और। गंभीर चोट के चलते उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
गैहरा की जानलेवा चट्टान
पांच जुलाई को चंबा-भरमौर एनएच पर गैहरा में भारी भरकम चट्टान निजी बस पर आ गिरी, जिसमें एक युवक की मौत हो गई, जबकि चार अन्य घायल हो गए। बस में सवार 30 लोग चौरासी मंदिर परिसर में आयोजित शिव पूजन में हिस्सा लेने के बाद घर लौट रहे थे।
भरमौर का बेकाबू पत्थर
छह जुलाई को भरमौर के ढकोग-बन्नी संपर्क मार्ग पर धर्मशाला के नड्डी क्षेत्र से दो परिवार दो गाडिय़ों में बन्नी माता मंदिर में माथा टेकने के लिए आए थे और दर्शन कर घर लौट रहे थे।
इसी दौरान कैंची मोड़ के पास अचानक पहाड़ी से चट्टान चलती कार पर गिर गई, जिसकी चपेट में आने से इसमें सवार 14 वर्षीय दीक्षिता पुत्री नवदीप वासी डल लेक नड्डी की मौके पर ही मौत हो गई।

