काँगड़ा – राजीव जसवाल
डा. राजेंद्र प्रसाद राजकीय आयुर्विज्ञान चिकित्सा महाविद्यालय टांडा अस्पताल के पैथोलॉजी विभाग की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है।
एक मरीज ने 24 जून को निर्धारित शुल्क जमा करवाकर अपनी जांच के लिए सैंपल दिया था, लेकिन लगभग एक माह बीतने को है, उसे रिपोर्ट उपलब्ध नहीं करवाई गई।
पीडि़त का कहना है कि बिल कटने के बावजूद विभाग ने सैंपल को लंबे समय तक अपने पास ही रखा और रिपोर्ट तैयार नहीं की।
मरीज लगातार रिपोर्ट के लिए अस्पताल के चक्कर काटता रहा, लेकिन उसे हर बार इंतजार करने को कहा गया।
समय पर रिपोर्ट न मिलने के कारण इलाज शुरू होने में भी देरी हुई, जिससे मरीज और उसके परिजनों में भारी रोष है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि कई बीमारियों में जांच रिपोर्ट के आधार पर ही उपचार शुरू होता है।
यदि रिपोर्ट समय पर न मिले, तो मरीज की बीमारी गंभीर हो सकती है और कुछ मामलों में जान का खतरा भी पैदा हो सकता है।
मरीज और उसके परिजनों ने अस्पताल प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
उनका कहना है कि सरकारी अस्पतालों में इस तरह की लापरवाही मरीजों के जीवन के साथ खिलवाड़ है और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
टीएमसी के पैथोलॉजी के एसोसिएट प्रो. डाक्टर बाल चंद्र ने बताया कि मशीनें मैनुअली वर्क कर रही हैं, जिसके चलते इसमें देरी हुई है, जल्द रिपोर्ट तैयार करवाकर दे दी जाएगी।

