हिमखबर डेस्क
जैसे-जैसे तापमान चढ़ रहा है वैसे-वैसे ही मंडी जिला की सराघाटी के प्रसिद्ध शक्तिपीठ माता शिकारी देवी मंदिर में भी श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने लगी है। 11 हजार फीट की उंचाई पर बसे माता शिकारी देवी मंदिर में इन दिनों श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। रोजाना सैंकड़ों श्रद्धालु माता के दर्शन कर आशीर्वाद लेने पहुंच रहे हैं।
माता शिकारी देवी मंदिर के पुजारी सुरेश शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि रोजाना मंदिर में सैंकड़ों की संख्या में श्रद्धालु दर्शनों के लिए पहुंच रहे हैं। छुट्टी वाले दिन यह संख्या और ज्यादा बढ़ जाती है। मंदिर प्रशासन द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा हेतु सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं।
पुजारी ने बताया कि माता शिकारी देवी मंदिर के कपाट प्रत्येक वर्ष 15 मार्च को श्रद्धालुओं के लिए खोले जाते हैं तथा 15 नवंबर को विधिवत रूप से बंद कर दिए जाते हैं।
धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र माने जाने वाले माता शिकारी देवी मंदिर की खूबसूरती श्रद्धालुओं को बरबस ही अपनी ओर आकर्षित कर देती है। प्रकृति की गोद में बसे इस पावन स्थल पर पहुंचने के बाद श्रद्धालुओं का मन यहां से लौटने को नहीं करता।
जयकारों और भक्तिमय माहौल के बीच श्रद्धालु माता के चरणों में माथा टेककर अपनी मनोकामनाएं पूर्ण होने की कामना करते हैं। वहीं, कई श्रद्धालु मनोकामना पूरी होने पर जातर लेकर भी आते हैं।
चंडीगढ़ से आए अभिषेक, कुमारसेन से आई ज्योति ठाकुर और निरमंड से आई फूला देवी ने बताया कि माता शिकारी देवी के दरबार में आकर एक अलग सी अनुभूति का अहसास होता है। जहां मैदानों में भीषण गर्मी पड़ी है वहीं यहां पर जैकेट और स्वेटर पहनने पड़ रहे हैं।
बता दें कि शिकारी देवी मंदिर अब चारों दिशाओं से सड़क सुविधा से जुड़ गया है। पहले मंदिर तक वाया जंजैहली जाने का ही विकल्प था लेकिन अब चैलचौक से वाया देवीदड़-सड़क मार्ग होकर भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंच रहे हैं।
यह मार्ग थोड़ा रोमांच और एडवेंचर से भरपूर होने के बावजूद सबसे नजदीकी रास्तों में माना जाता है। इसके अलावा श्रद्धालु वाया जंजैहली तथा वाया करसोग सड़क मार्ग से भी मंदिर पहुंच रहे हैं।

