हिमखबर डेस्क
हिमाचल प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं परिवहन मंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा है कि हिमाचल सड़क परिवहन निगम (एचआरटीसी) के चालकों और परिचालकों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और कर्मचारियों के साथ मारपीट या दुर्व्यवहार करने वाले किसी भी उपद्रवी को बख्शा नहीं जाएगा।
उन्होंने कहा कि हमलावरों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अग्निहोत्री ने रविवार को शिमला में घोड़ा चौकी के पास एचआरटीसी वोल्वो बस के चालक पर हुए हमले की कड़ी निंदा करते हुए इस घटना को बहुत दुर्भाग्यपूर्ण बताया।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस मामले को बहुत गंभीरता से ले रही है और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। अग्निहोत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश अपनी समृद्ध संस्कृति, सभ्यता और मेहमाननवाजी के लिए देशभर में जाना जाता है और वह ऐसी अमानवीय और असामाजिक घटनाओं की अनुमति नहीं दे सकता जो राज्य की छवि को खराब करती हैं।
उन्होंने मामले में तुरंत कार्रवाई के बाद पुलिस के द्वारा चार आरोपियों को गिरफ्तार करने की भी बात कही। पुलिस प्रशासन और एचआरटीसी अधिकारियों को निष्पक्ष जांच करने और दोषियों के खिलाफ सख्त कारर्वाई सुनिश्चित करने के निर्देश भी जारी किए गए हैं ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि एचआरटीसी के चालक और परिचालक मुश्किल हालात में भी दूर-दराज के इलाकों समेत पूरे राज्य के लोगों को परिवहन सेवा देने के लिए बहुत मेहनत करते हैं और उनका योगदान काबिल-ए-तारीफ है।
उन्होंने कहा कि ऐसे मेहनती कर्मचारियों की इज्जत, सुरक्षा और सम्मान को कम करने की कोई भी कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अग्निहोत्री ने कहा कि राज्य सरकार एचआरटीसी कर्मचारियों के हितों और सुरक्षा की रक्षा के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।
बता दे कि एचआरटीसी की वोल्वो बस रविवार सुबह करीब 6 बजे घोड़ा चौकी क्षेत्र में पहुंची थी। इसी दौरान हरियाणा से आए कुछ पर्यटकों ने बस को रुकवाया और चालक के साथ मारपीट शुरू कर दी। घायल चालक की पहचान राजेंद्र सिंह के रूप में हुई है।
बस चालक राजेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि उनकी बस द्वारा पर्यटकों की गाड़ी को ओवरटेक करने के बाद विवाद शुरू हुआ। उनका कहना है कि आरोपियों ने उन्हें चलती बस से बाहर खींच लिया और मारपीट की। चालक के अनुसार यदि समय रहते बस कंडक्टर ने हैंडब्रेक नहीं लगाया होता तो बस में सवार लगभग 40 यात्रियों की जान खतरे में पड़ सकती थी।

