भीड़ से दूर हिमाचल के हिडन टूरिस्ट प्लेसेस, जहां मिलता है असली सुकून, हिमाचल में इतने सारे स्वर्ग, सुकून की तलाश खत्म

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हिमखबर डेस्क

वह वक्त कोई और था, जब घूमने के लिए शहर पहली पसंद होते थे। लोग छुट्टियां बिताने के लिए उन्हीं जगहों का रुख करते थे, जो पर्यटन मानचित्र पर सबसे ऊपर थे, लेकिन वक्त के साथ अब लोगों की पसंद भी बदल गई है। बच्चे हों या बुजुर्ग, काम के बोझ तले पिसते कर्मचारी हों या आम नागरिक।

उन्हें अब सुकून चाहिए और मन की शांति के लिए शांत स्थल चाहिए, जहां थकान का नामोनिशां मिट जाए और जब छुट्टियां बिताकर घर लौटें तो नई उमंग और तरंग के साथ। ब्रितानी सर्च एग्रीगेटर एवं ट्रैवल एजेंसी स्काईस्कैनर की ताजा रिपोर्ट आई है, जिसमें पता चला है कि पर्यटकों को सबसे ज्यादा कौन सी जगहें पसंद हैं।

छुट्टियां बिताने के लिए पसंदीदा स्थान चुनने के भारतीय पर्यटकों के मानदंड बदल रहे हैं और अब वे ऐसी जगहों पर जाना चाहते हैं जहां कुछ नया अनुभव मिले और बहुत ज्यादा लोग न जाते हों। पश्चिम एशिया संकट के कारण लोगों ने अपने गंतव्य जरूर बदले हैं लेकिन छुट्टियों पर बाहर जाना पूरी तरह टाला नहीं है।

उन्होंने कहना है कि आम तौर पर भी अब पर्यटक अपने गंतव्य और समय को लेकर काफी लचीलापन दिखा रहे हैं। यही कारण है कि 48 फीसदी भारतीय पर्यटक अब नॉन-पीक टाइम यानी उन दिनों में भी सफर करने के लिए तैयार हैं जब भीड़ ज्यादा नहीं होती। रिपोर्ट के अनुसार एक-तिहाई लोग छुट्टी रद्द करने की बजाय अपना गंतव्य बदलने के लिए तैयार हैं।

हिमाचल पहली पंसद

पर्यटकों की पहली पसंद शांत पहाड़ हैं। भारत में कई ऐसे राज्य हैं, जो अपने शांत वातावरण के लिए जाने जाते हैं। हिमाचल एक ऐसा राज्य है, जहां कुदरत वास करती है और घूमने के शौकीनों के लिए पहली पसंद है। डलहौजी, कुल्लू-मनाली, शिमला, मकलोडगंज, रोहतांग तो पर्यटकों की पहली पसंद हैं, लेकिन भीड़ ज्यादा होने के चलते हिमाचल आने वाले मेहमान ऐसी जगहों की तलाश करते हैं, जहां न ज्यादा भीड़ हो और न ही शोर-शराबा। पर्यटकों की इसी पसंद को देखते हुए हिमाचल सरकार पर्यटन के अनछुए क्षेत्रों को निखार रही है, जहां मेहमान कुदरत को करीब से निहार सकें।

हिमाचल के अनछुए शांत पर्यटक स्थल

कुल्लू जिला—जिभी, जलोड़ी, तीर्थन घाटी, बिजली महादेव, मलाणा, ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क, लाहुल-स्पीति, मियार वैली, ताबो आदि। किन्नौर—चितकुल, सांगला, कल्पा, निचार, नाको, कामरू। मंडी—पराशर झील, जंजैहली, रिवालसर झील, भूतनाथ मंदिर, करसोग, तत्तापानी, कामाक्षा देवी, ममलेश्वर महादेव और बरोट घाटी। शिमला—पब्बर घाटी, चांशल दर्रा, नारकंडा, कुफरी, मतियाना, चैडविक फॉल, किआला फोरेस्ट, डोडराक्वार कांगड़ा—त्रियूंड, करेरी, बोह, धर्मकोट, खड़ौता, हिमानी चामुंडा, जीया। चंबा—भरमौर, कुगती, खजियार, चमेरा झील, पांगी, किलाड़, साच दर्रा, हुदान और सुराल

पहले पहुंच मुश्किल थी, पर अब आसान

ब्रितानी सर्च एग्रीगेटर एवं ट्रेवल एजेंसी स्काईस्कैनर की रिपोर्ट में कहा गया है कि 81 प्रतिशत भारतीय पर्यटकों को नई जगहों पर जाने से कोई गुरेज नहीं है, जबकि 60 प्रतिशत से अधिक लोग कम भीड़-भाड़ वाली शांत जगहों को पसंद करते हैं।

स्काईस्कैनर के भारतीय कारोबार के प्रमुख नील घोष ने बताया कि छोटे-छोटे और नये पर्यटन स्थलों के उभरकर सामने आने का एक कारण यह भी है कि पहले जहां ये जगहें दुर्गम थीं, अब इनके लिए परिवहन सुविधाएं आसानी से उपलब्ध हैं।

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