तकनीक: खून की गति नियंत्रित कर कैंसर मरीजों को दर्द से राहत देगा कीमो ग्लव, जुराब पर भी काम जारी’; जानें

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हिमखबर डेस्क

कैंसर के मरीजों को कीमोथैरेपी के चलते होने वाले असहनीय दर्द से अब कुछ हद तक राहत मिल सकती है। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान हमीरपुर (एनआईटी) के इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के विद्यार्थियों ने स्मार्ट तकनीक विकसित की है, जो कीमोथैरेपी के बाद खून के प्रवाह को नियंत्रित कर दर्द को कम करने में मदद करेगी।

कीमोथैरेपी में उपयोग होने वाली ऑक्सालिप्लाटिन दवा अक्सर हाथ पैर की अंगुलियों और नाखूनों के टिश्यू को प्रभावित करती है। इससे मरीजों को सुन्नता, झुनझुनी और तीव्र दर्द का सामना करना पड़ता है। इसी समस्या के समाधान के लिए विद्यार्थियों ने कीमो प्रैस ग्लव (दस्ताना) तैयार किया है।

इस ग्लव का प्रोटोटाइप करीब 12 से 15 हजार रुपये की लागत से तैयार किया गया है, जिसे डॉक्टर की निगरानी में इस्तेमाल किया जा सकता है। यह ग्लव कलाई की नसों पर नियंत्रित दबाव डालकर खून के प्रवाह को धीमा करता है, जिससे दवा का प्रभाव अंगुलियों तक कम गति से पहुंचता है और दर्द में राहत मिलती है।

यह ग्लव माइक्रो कंट्रोलर आरडीनो उनो से संचालित होता है, जिसमें प्रेशर सेंसर और एयर पंप लगाए गए हैं। ब्लूटूथ और वाई-फाई के माध्यम से इसे फोन या कंप्यूटर से नियंत्रित किया जा सकता है। जरूरत के अनुसार एयर पंप दबाव बढ़ाता या घटाता है। डॉक्टर मरीज की स्थिति के अनुसार प्रेशर सेट कर सकते हैं।

सामान्य स्थिति में नसों में खून का प्रवाह 20 से 30 हेक्टोपास्कल के बीच होता है। ग्लव में प्रेशर को बढ़ाकर 33 से 35 हेक्टोपास्कल तक रखा जाता है, जिससे खून की गति धीमी हो जाती है लेकिन बहाव पूरी तरह रुकता नहीं। अगर दबाव तय सीमा से अधिक हो जाए तो सेंसर तुरंत सिग्नल भेजते हैं और माइक्रो कंट्रोलर एयर पंप को प्रेशर कम करने का निर्देश देता है।

टीम वैभव के प्रतिभागियों छात्र दिवांश, हार्दिक, राघव और पलक ने इस तकनीक को सुझाया है। यह टीम निंबस टेक फेस्ट में द्वितीय स्थान पर रही है। टीम अब इस तकनीक को जुराब के रूप में विकसित कर रही है, ताकि अंगुलियों में होने वाले दर्द से राहत मिल सके।

डॉ. अर्चना नानोटी, रजिस्ट्रार, एनआईटी हमीरपुर के बोल

संस्थान में विद्यार्थियों को नवाचार के लिए लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है। बेहतर आइडिया को विकसित करने के लिए फैकल्टी मेंबर मार्गदर्शन कर रहे हैं।

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