घास काटने के औजार बने मौत के हथियार, लोग दराट, दराटी और कुल्हाड़ी से उतारे जा रहे मौत के घाट

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हिमखबर डेस्क

हिमाचल की धरा पर घास काटने के औजार ही दूसरे को मौत के घाट उतारने के हथियार बन गए हैं। दराट, दराटी और कुल्हाड़ी का प्रहार ही मौत बांट रहे हैं। सरकाघाट के सिया हत्याकांड से लेकर कई अन्य मामलों में हत्या करने के लिए खेती के यही औजार प्रयोग किए गए हैं।

पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज मामलों में तेज धार हथियार के वार से मौत के घाट उतारे जाने का उल्लेख किया जाता है, लेकिन इन्हीं तेज हथियारों में दराटी, कुल्हाडी और दराट का प्रहार छिपा हुआ है। इन सबके बीच चाकू भी मौत बांटने के लिए प्रयोग किया जा रहा है।

मंडी, कांगडा और हमीरपुर सहित प्रदेश के अन्य हिस्सों में बीते कुछ सालों में हुई हत्याओं में से अधिकांश में यही तेज धार हथियार प्रयोग में लाकर मौत का खेल खेला गया है। पुरानी रंजिश और आपसी तनातनी में इन हथियारों का प्रयोग किया जा रहा है। तेजधार हथियारों के वार के निशाने पर महिलाएं भी रही हैं। सिया को दराट से मौत बांटी गई है।

इसी तरह का मामला देहरा में मिड-डे मील कर्मचारी महिला का दराटी से गला रेतने, लंबागांव के कुटाहण में महिला को कुल्हाडी से काटने के मामले घटित हुए हैं। बिलासपुर के तलाई में एक भेडपालक को भी कुल्हाड़ी से काटकर मौत के घाट उतारा गया है।

चंबा में एक युवक के टुकड़े कर मारने सहित कुल्लू की पार्वती घाटी में भी घरेलु औजारों से मौत के घाट उतारने के मामले पुलिस रिकार्ड में दर्ज हैं। मंडी पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार कहते हैं कि पुलिस सभी आपराधिक मामलों की गहनता से छानबीन करती है। आपराधियों को कोर्ट से सजा दिलाने के लिए ठोस सबूत जुटाए जाते हैं।

घरेलू हथियार के सहारे प्रहार

हिमाचल पुलिस के रिकॉर्ड में यह स्पष्ट दर्ज है कि आपराधिक वारदातों को अंजाम देने के लिए प्रयोग किए जा रहे हथियारों में 40 फीसदी तेजधार हथियार हैं। घरेलू हथियारों के सहारे प्रहार कर मौत के घाट उतारने से लेकर गंभीर घायल करने के मामले दर्ज हैं।

पांच साल में 430 हत्याएं

पुलिस रिकार्ड के मुताबिक साल 2021 से लेकर 2025 तक कुल 430 हत्याएं की गई। इसी समय अवधि में मरने वालों में से 125 महिलाएं शामिल हैं। प्रदेश में हर साल औसतन 86 कत्ल हो रहे हैं। फरवरी तक कुल 21 हत्याएं हुई हैं इनमें नौ महिलाएं हैं।

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