नए 23 डिग्री कालेजों में से सिर्फ तीन चलेंगे; 20 कालेज होंगे बंद, अन्य जगह बदला जाएगा स्टाफ

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कुपवी-नौहराधार और बनीखेत कालेज ही रहेंगे जारी, शिक्षा में गुणवत्ता लाने के लिए किए गए दो बड़े फैसले

शिमला – नितिश पठानियां

पूर्व भाजपा सरकार के कार्यकाल में चुनावी वर्ष में खोले गए 23 डिग्री कालेजों में से आखिरकार 20 फेल हो गए हैं। कैबिनेट ने सिर्फ तीन डिग्री कालेजों को आगे चलाने का फैसला किया है। इनमें कुपवी, नौहराधार और बनीखेत कालेज शामिल हैं। इन सभी में 75 से ज्यादा एडमिशन थी। यही शर्त लगाते हुए कैबिनेट ने बुधवार को यह फैसला लिया है।

कैबिनेट में शिक्षा विभाग की ओर से रखी गई रिपोर्ट के मुताबिक सिर्फ पांच कालेजों में ही एडमिशन हुई थी, जबकि पांच कालेज ऐसे भी थे, जिनमें जीरो एडमिशन थी। इस रिपोर्ट के मुताबिक बनीखेत में 188, रिडक़मार में 61, छतरी में 60, नोहराधार में 77 और कुपवी में 86 बच्चे एडमिशन ले चुके थे।

इनमें से शाहपुर का रिडक़मार और सिराज का छतरी कालेज भी 75 एडमिशन की शर्त पास नहीं कर पाया है। बाकी 20 डिग्री कालेजों को अब निष्क्रीय माना जाएगा। यहां तैनात हो चुके स्टाफ को अन्य डिग्री कालेजों में भेजा जाएगा, जहां स्टाफ की कमी है।

शिक्षा विभाग की रिपोर्ट कहती है कि नए कालेज खोलने के कारण पुराने कालेजों में संसाधनों की कमी हुई है और शिक्षा की गुणवत्ता भी गिरी है। भाजपा सरकार के दौरान अप्रैल 2022 से चुनाव आचार संहिता तक कुल 23 डिग्री कालेज नए खुले थे। इनमें से पांच डिग्री कॉलेजों में जीरो एडमिशन थी।

इनमें हमीरपुर जिला का लंबलू डिग्री कालेज, मंडी जिला का पांगणा डिग्री कालेज, शिमला जिला का जलोग डिग्री कालेज, सोलन जिला का चंडी डिग्री कालेज और रामपुर के पास खोला गया सिंगला डिग्री कालेज शामिल है।

बाकी डिग्री कालेजों की बात करें, तो बालसिन्हा में 20, गलोड़ में 10, पण्डोह में 21, ममलीग में पांच, नूरपुर के बरांडा में 06, सतौन में 11, सोलन के बरुणा में 35, स्वारघाट में 20, चंबा के मसरुंड में 28, कोटला में एक, चढिय़ार में 12, बागाचनौगी में तीन और जगतसुख में 04 छात्रों ने एडमिशन ली है।

ये कॉलेज अब फंक्शनल नहीं रहेंगे। एडमिशन ले चुके स्टूडेंट्स को अन्यत्र ट्रांसफर किया जाएगा।

सरकार ने 400 शिक्षकों का डेपुटेशन किया रद्द

स्कूलों में शिक्षकों के खाली पद भरने और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए राज्य सरकार ने टीचर्स का डेपुटेशन भी कैंसिल कर दिया है। करीब 400 शिक्षक या तो जिला मुख्यालय या निदेशालय में काम कर रहे हैं। कईयों ने डेपुटेशन अपनी सुविधानुसार कहीं और करवा रखी है।

इनमें से अधिकांश डेपुटेशन के मामले कई साल पुराने हैं। इन सभी को रद्द कर दिया गया है और इन शिक्षकों को ओरिजिनल स्कूल में ही सेवाएं देनी होंगी। इसके बाद अगली प्रक्रिया युक्तिकरण की शुरू होगी। राज्य सरकार स्कूल में बच्चों की संख्या के हिसाब से ही टीचर नियुक्त करेगी।

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