शाहपुर – नितिश पठानियां
वर्ष 2026 में रंगों का पर्व होली आज तीन मार्च को मनाया जा रहा है लेकिन इस साथ ही खग्रास चंद्रग्रहण भी है। यानी होली और चंद्रग्रहण एक ही साथ हैं। शाहपुर के ज्योतिषी आचार्य पंडित अमित कुमार शर्मा के अनुसार 3 मार्च होली के दिन खग्रास चंद्र ग्रहण दोपहर 3:19 बजे शुरू होकर शाम 6:47 बजे तक रहेगा।
खास बात ये कि यह उदित चंद्र ग्रहण होगा, यानी चंद्रमा निकलते समय ही ग्रहण दिखाई देगा। लगभग 17 मिनट तक चंद्रमा पूरी तरह से ढका रहेगा, जिसे पूर्ण खग्रास स्थिति कहा जाता है। ज्योतिषी आचार्य पंडित अमित कुमार शर्मा ने बताया कि ग्रहण से पहले शुरू होने वाले सूतक काल में पूजा-पाठ, शुभ कार्य और धार्मिक अनुष्ठान करना उचित नहीं माना जाता, इसलिए इस दौरान लोग विशेष सावधानी बरतते हैं और ग्रहण समाप्त होने के बाद ही पूजा-अर्चना करते हैं।
उन्होंने कहा कि अगर आप चंद्रग्रहण के दिन यानी 3 मार्च को होली खेलते हैं तो विशेष सावधानी रखने की जरूरत है। ग्रहण के समय केवल सूखे रंग यानी गुलाल से होली खेली जा सकती है। इससे पर्व की धार्मिक मान्यता बनी रहती है और किसी तरह का ग्रहण दोष भी नहीं लगता।
उन्होंने बताया कि इस दौरान पानी से होली खेलने से बचना है क्योंकि, यह शास्त्रों के अनुसार उचित नहीं माना जाता। वहीं, ज्योतिषी आचार्य पंडित अमित कुमार शर्मा ने बताया कि ग्रहण काल साधना के लिए विशेष फलदायी माना जाता है। इस दौरान इष्ट देव या गुरु मंत्र की माला जप करने से मंत्र सिद्धि का लाभ मिलता है।
क्यों मनाया जाता है होली पर्व?
पौराणिक कथाओं के अनुसार, होली की शुरुआत श्रीकृष्ण और राधा रानी की अठखेलियों से हुई थी। कथा के अनुसार, श्रीकृष्ण का रंग सांवला था और राधा रानी गोरी थीं जिसपर श्रीकृष्ण मां यशोदा से अक्सर शिकायत किया करते थे कि वे सांवले क्यों हैं। यशोदा मैया ने श्रीकृष्ण को कहा कि तुम अपने जैसा रंग राधा के चेहरे पर लगा दो जिससे दोनों एक जैसे दिखने लगें।
श्रीकृष्ण खुश होकर अपने मित्रों के साथ राधा रानी को रंग लगाने निकल गए। माना जाता है कि श्रीकृष्ण और उनके मित्रों ने राधा रानी और गोपियों के संग जमकर रंग खेला। इसके बाद से ही होली मनाने का चलन शुरू हो गया और हर साल बेहद उत्साह के साथ रंगों का पर्व होली मनाया जाने लगा।

