होली उत्सव में दिख रही हमीरपुर की लोक संस्कृति की शानदार झलक, कवि सम्मेलन, भजन गायन, लोकनृत्य और लोक गाथाओं की प्रस्तुतियों के लिए बनाया गया है अलग मंच
हिमखबर डेस्क
सुजानपुर में आयोजित राष्ट्रीय स्तरीय होली उत्सव के दौरान सांस्कृतिक संध्या उस समय यादगार बन गई, जब पंजाबी गायक मनकीरत ओलख के गानों ने पूरे पंडाल को झूमने पर मजबूर कर दिया। कार्यक्रम में मौजूद आम जनता के साथ-साथ प्रशासनिक अधिकारी भी खुद को थिरकने से नहीं रोक पाए।
हमीरपुर जिले में चल रहे इस भव्य उत्सव के दौरान जैसे ही मनकीरत ओलख ने मंच संभाला, माहौल पूरी तरह उत्सवमय हो गया। उन्होंने अपने लोकप्रिय पंजाबी गीतों की प्रस्तुति से दर्शकों में जबरदस्त ऊर्जा भर दी। पंडाल में मौजूद हजारों लोग गीतों की धुन पर झूम उठे।
कार्यक्रम का सबसे खास पल तब आया, जब जिले के उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक भी मंच के समीप पहुंचकर भांगड़ा करने लगे। आमतौर पर प्रशासनिक कार्यों और कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारियों में व्यस्त रहने वाले इन अधिकारियों का यह अलग अंदाज लोगों को खूब भाया। दर्शकों ने तालियों और सीटियों के साथ उनका उत्साहवर्धन किया।

कार्यक्रम में उपस्थित अन्य उपमंडल और जिला स्तरीय अधिकारियों ने भी सांस्कृतिक संध्या का भरपूर आनंद लिया। गंभीर और सख्त छवि वाले प्रशासनिक अधिकारियों का यह मानवीय और सहज रूप चर्चा का विषय बना रहा। लोगों ने इसे प्रशासन और जनता के बीच बेहतर सामंजस्य का प्रतीक बताया।
मनकीरत ओलख ने ‘भाभी’, ‘कदर’ और ‘8 रफ्लां’ जैसे अपने सुपरहिट गीतों की प्रस्तुति देकर समां बांध दिया। उनकी दमदार आवाज और मंच पर जोशीली मौजूदगी ने पूरे सुजानपुर को सुरों से सराबोर कर दिया।
वहीं दूसरी तरफ राष्ट्र स्तरीय होली उत्सव सुजानपुर-2026 में इस बार सांस्कृतिक संध्याओं में हिमाचली कलाकारों की प्रस्तुतियों के अलावा दिन में भी विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से जिला हमीरपुर की लोक संस्कृति की शानदार झलक देखने को मिल रही है।
होली उत्सव आयोजन समिति ने पहली बार प्रदर्शनी स्टॉलों के बीच में विशेष रूप से एक अलग स्टेज बनाया है, जहां प्रतिदिन कई सांस्कृतिक गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। इसी मंच पर उत्सव के पहले दिन एक मार्च को कवि सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसमें जिले भर के कवियों ने हिंदी और पहाड़ी मंे अपनी शानदार रचनाएं प्रस्तुत कीं।

सांस्कृतिक गतिविधियों के संयोजक जिला भाषा अधिकारी संतोष कुमार पटियाल ने उत्सव के पहले दिन इसी मंच पर एकतारा, करताल और पारंपरिक छोटी डफली (डौरू) के साथ भजनों एवं दोहों का गायन करने वाली मंडलियों को भी अवसर प्रदान किया गया।
जिला हमीरपुर, बिलासपुर और मंडी जिला के निचले क्षेत्रों की यह प्राचीन भजन गायन परंपरा अब लुप्त होने की कगार पर है। लेकिन, होली के मंच पर भजन गायन की इस शैली को देखकर लोग काफी प्रभावित हुए। प्रदर्शनी स्टॉलों के परिसर में ही चित्रकला प्रतियोगिता भी करवाई गई।
होली उत्सव के दूसरे दिन लोकनृत्य प्रतियोगिता करवाई गई। इसमें कुसुम कला मंच ने पहला, डिग्री कालेज सुजानपुर के दल ने दूसरा और शुभम कला मंच ने तीसरा स्थान हासिल किया। इन दलों को स्थानीय विधायक कैप्टन रणजीत सिंह ने पुरस्कार वितरित किए।

आयोजन समिति ने प्रथम रहे सांस्कृतिक दल को ग्यारह हजार रुपये, द्वितीय को 5100 रुपये और तृतीय दल को 3100 रुपये के नकद पुरस्कार का प्रावधान किया है। इस प्रतियोगिता के साथ ही सामूहिक लोकनृत्य झमाकड़ा भी करवाया गया, जिसमें जिले भर की सैकड़ों महिलाओं ने बड़े उत्साह के साथ भाग लिया।

