
जवाली, अनिल छांगू
पौंग झील किनारे खाली पड़ी जमीन पर बाहुबलियों ने हल चलाना शुरू कर दिया है तथा इसकी सिल्ट से पौंग बांध के अस्तित्व पर खतरे के बादल मंडराने शुरू हो गए हैं। पौंग झील किनारे खाली पड़ी जमीन पर बाहुबली धड़ल्ले से ट्रेक्टरों के माध्यम से जमीनों को कुरेदने में लगे हुए हैं लेकिन बीबीएमबी व वन्य प्राणी विभाग कुंभकर्णी नींद सोया हुआ है।
बाहुबलियों की मनमर्जी पर रोक लगाने में कोई भी आगे नहीं आ रहा है। हरसर,-चलवाडा़- गुगलाडा़, घाड़जरोट, नगरोटा सूरियां इत्यादि में जमीन को दिन-रात कुरेदने में लगे ट्रैक्टरों को देखा जा सकता है। पर्यावरण प्रेमियों ने कहा कि पौंग झील किनारे गेहूं की खेती करने को अभी से ही बाहुबलियों ने कमर कस ली है तथा जमीन की जुताई में जुट गए हैं।
इसके बाद कुरेदी ही जमीन में पानी आ जाएगा तो सारी सिल्ट डैम में चली जाएगी तथा ऐसे में धीरे-धीरे पौंग बांध का अस्तित्व खत्म होता जा रहा है। पौंग बांध में काफी ज्यादा सिल्ट जम चुकी है। गहराई कम होती जा रही है। पौंग बांध किनारे खाली जमीन वन्य प्राणी विभाग की है तथा इस जमीन पर खेती करना अवैध है परंतु बाहुबली बिना ख़ौफ़ के खेती कर रहे हैं। पर्यावरण प्रेमी राज कुमार, प्रीतम, संजीव कुमार, विजय कुमार, नरेश सिंह, शेर सिंह इत्यादि ने कहा कि पौंग झील की खाली जमीन पर खेती पर रोक लगाई जाए तथा पौंग बांध के अस्तित्व को बचाया जाए।
क्या कहते हैं डीएफओ हमीरपुर राहुल एम रहाणे
वीओ- डीएफओ हमीरपुर राहुल एम रोहाणी ने कहा कि पौंग झील किनारे खाली जमीन पर खेती नहीं होने दी जाएगी। उन्होंने कहा कि अगर कोई ट्रेक्टर चलाता पाया गया तो ट्रेक्टर को जब्त कर लिया जाएगा तथा ट्रेक्टर चालक सहित मालिक के खिलाफ केस दर्ज किया जाएगा।
