
भाजपा से चेतन बरागटा, कांग्रेस से रोहित ठाकुर प्रत्याशी तय, टिकट के ऐलान से पहले ही प्रचार में डटे दोनों नेता
शिमला- जसपाल ठाकुर
शिमला जिला के जुब्बल कोटखाई में होने जा रहे चुनाव एक तरह से विरासत की लड़ाई के रूप में लड़े जाएंगे। उपचुनाव में जा रही एक लोकसभा और तीन विधानसभा की सीटों में से केवल जुब्बल कोटखाई की ही सीट ऐसी है, जहां भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशियों की तस्वीर साफ है। यहां भाजपा से पूर्व मंत्री नरेंद्र बरागटा के बेटे चेतन बरागटा और कांग्रेस से पूर्व सीपीएस और पूर्व मुख्यमंत्री रामलाल ठाकुर के पोते रोहित ठाकुर प्रचार के लिए मैदान में हैं।
हालांकि अभी टिकट का ऐलान होना बाकी है। इन दोनों प्रत्याशियों में विरासत की लड़ाई है। भाजपा में सेब बेल्ट के प्रभावी नेता रहे नरेंद्र बरागटा के निधन के बाद उनके प्रति सहानुभूति को पार्टी भुनाना चाहती है। यही कारण है कि चेतन बरागटा को पार्टी का चेहरा बनाया गया है।
उनकी मांग पर हाल ही में जुब्बल कोटखाई को एक साथ दो-दो एसडीएम आफिस दिए गए हैं। नरेंद्र बरागटा बेशक इस बार मंत्री बनने से चूक गए थे, लेकिन उन्हें जयराम सरकार ने चीफ व्हिप बनाया था। सेब क्षेत्र के लिए बागबानी मंत्री रहते हुए भी नरेंद्र बरागटा ने बहुत काम किए। अब विरासत को संजोने की चुनौती बेटे के सामने है।
दूसरी ओर कांग्रेस में भी पूर्व मुख्यमंत्री रामलाल ठाकुर के पोते रोहित ठाकुर के पास विरासत का ही सहारा है। वह इससे पहले कांग्रेस सरकार में मुख्य संसदीय सचिव जरूर रहे, लेकिन उस समय के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के साथ उनकी ज्यादा नहीं बनी। उसकी वजह भी पुरानी थी।
रामलाल ठाकुर से इस बार वीरभद्र सिंह को भी चुनाव में हारना पड़ा था, लेकिन मृदुभाषी और मिलनसार रोहित ठाकुर ने दादा की तैयार की जमीन पर खुद को साबित किया है। हालांकि वह भी लगातार दूसरा चुनाव नहीं जीत पाए। इस बार उनकी भी परीक्षा है।
भाजपा के सामने बगावत की चुनौती ज्यादा
इस सीट पर अपनों की बगावत भाजपा के सामने बड़ी चुनौती है। इस सीट पर भाजपा से जिला परिषद सदस्य रही नीलम सरैइक चुनाव लडऩे का ऐलान कर सकती हैं। चुनाव घोषित होते ही इसी सीट से प्रज्ज्वल बस्टा को अब भाजपा में प्रवक्ता बना दिया गया है।
यह फैसला में आग में घी का काम न करे, ऐसा खतरा है। संघ की पृष्ठभूमि के सुशांत देष्टा भी भाजपा से टिकट चाह रहे हैं। दूसरी ओर कांग्रेस में इस क्षेत्र में वीरभद्र सिंह परिवार के करीब यशवंत छाजटा आदि जरूर हैं, लेकिन किसी ने चुनाव लडऩे के संकेत अब तक नहीं दिए हैं।
13 चुनाव में 10 बार जीती कांग्रेस
जुब्बल कोटखाई सीट पर परंपरागत रूप से कांग्रेस का पलड़ा भारी रहा है। 1951 से अब तक हुए 13 चुनावों में विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने दस बार इस सीट पर कब्जा जमाया है। कांग्रेस के रामलाल ठाकुर यहां से छह बार विधायक रहे हैं। उनके पोते रोहित ठाकुर ने 2012 में यहां से पहला चुनाव लड़ा था।
इसी सीट पर 1990 में वीरभद्र सिंह को रामलाल ठाकुर के हाथों हार मिली थी। भाजपा के खाते में दो बार यह सीट गई है। नरेंद्र बरागटा यहां से दो बार विधायक रहे हैं। जनता दल ने 1990 में एक बार यह सीट जीती थी।
