कांच के भीतर दुनिया…हिमाचल में कुदरत, परंपरा और रोजगार का जन्नत सरीखा संसार

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हिमखबर डेस्क

कल्पना कीजिए एक ऐसी जगह की, जहां एक ओर भारतीय ज्योतिष के 27 नक्षत्रों से जुड़े पौधे अपनी कहानी सुना रहे हों, दूसरी ओर युवा स्वरोजगार के नए अवसर तलाश रहे हों और कुछ ही कदम दूर कांच के भीतर एक छोटी-सी दुनिया प्रकृति के रहस्यों को संजोए हुए हो।

यह दृश्य किसी पर्यटन स्थल का नहीं, बल्कि डॉ. वाईएस परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी का है, जहां ज्ञान, प्रकृति और आत्मनिर्भरता का अनूठा संगम देखने को मिलेगा।

विश्वविद्यालय परिसर में विकसित नक्षत्र वाटिका, स्वरोजगार धाम और टेरेरियम ने हर आने वाले का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है। इन परियोजनाओं का उद्घाटन हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति ने किया है और इनके माध्यम से शिक्षा को नए आयाम देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया गया है। सबसे अधिक आकर्षण का केंद्र बनी नक्षत्र वाटिका।

नक्षत्र वाटिका

हरियाली से सजी नक्षत्र वाटिका में भारतीय ज्योतिष के 27 नक्षत्रों से जुड़े पौधों और वृक्षों को स्थान दिया गया है। यहां टहलते हुए ऐसा महसूस होता है, मानों प्रकृति और भारतीय परंपरा एक-दूसरे का हाथ थामे खड़ी हों। हर पौधा अपनी अलग पहचान और महत्व को दर्शाता है।

खास बात यह है कि हिमाचल प्रदेश में पहली बार इस तरह की नक्षत्र वाटिका विकसित की गई है, जिससे यह स्थान और भी विशेष बन गया है। भारतीय ज्योतिष में कुल 27 नक्षत्र माने गए हैं, जिनमें अश्विनी, भरणी, कृत्तिका, रोहिणी, मृगशिरा, आद्र्रा, पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा, मघा, पूर्वा फाल्गुनी, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, चित्रा, स्वाती, विशाखा, अनुराधा, ज्येष्ठा, मूल, पूर्वाषाढ़ा, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती शामिल हैं।

भारतीय परंपरा में इन नक्षत्रों का विशेष महत्व माना जाता है। प्रत्येक नक्षत्र को विशेष गुणों, प्रतीकों तथा वृक्षों और पौधों से जोड़ा गया है। इसी अवधारणा के आधार पर नौणी विश्वविद्यालय में नक्षत्र वाटिका विकसित की गई है, जहां सभी 27 नक्षत्रों से संबंधित पौधों का रोपण कर प्रकृति और भारतीय ज्ञान परंपरा का संरक्षण किया जाएगा।

वाटिका से आगे बढ़ते ही स्वरोजगार धाम नई संभावनाओं का संदेश देता नजर आता है। यहां युवाओं, किसानों और महिलाओं को केवल जानकारी ही नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर बनने की दिशा भी दिखाई जाएगी।

मधुमक्खी पालन, मशरूम उत्पादन, नर्सरी प्रबंधन और बागवानी जैसे क्षेत्रों से जुड़े प्रशिक्षण आने वाले समय में कई लोगों के लिए रोजगार के नए द्वार खोल सकते हैं। यह केंद्र बताता है कि खेती और बागवानी अब केवल परंपरा नहीं, बल्कि एक सफल उद्यम भी बन सकती है।

्रकांच के भीतर दुनिया

टेरेरियम आधुनिक सोच और पर्यावरण संरक्षण का सुंदर उदाहरण है। कांच के भीतर सिमटी यह छोटी-सी हरित दुनिया देखने वालों को आकर्षित करती है। नियंत्रित वातावरण में विकसित विभिन्न पौधे यह संदेश देते हैं कि सीमित संसाधनों में भी प्रकृति को संरक्षित और संवर्धित किया जा सकता है।

विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि ये परियोजनाएं केवल संरचनाएं नहीं, बल्कि सीखने और समझने के जीवंत केंद्र हैं। यहां विद्यार्थी पुस्तकों से बाहर निकलकर प्रकृति, अनुसंधान और उद्यमिता को करीब से समझ सकेंगे।

नौणी विश्वविद्यालय की यह पहल इस बात का प्रमाण है कि जब शिक्षा को प्रकृति और नवाचार से जोड़ा जाता है, तो वह केवल डिग्री तक सीमित नहीं रहती, बल्कि समाज और भविष्य दोनों को नई दिशा देने का माध्यम बन जाती है। यहां विकसित ये नई परियोजनाएं आने वाले वर्षों में न केवल विद्यार्थियों, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा का केंद्र बन सकती हैं।

ज्ञान के साथ व्यवहारिक अनुभव

विश्वविद्यालय के कुलपति कुलपति डॉ. हरमिंदर सिंह बवेजा ने कहा कि नक्षत्र वाटिका, स्वरोजगार धाम और टेरेरियम जैसी पहलें विद्यार्थियों को पुस्तकीय ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक अनुभव प्रदान करेंगी।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य शिक्षा को प्रकृति, अनुसंधान और नवाचार से जोडऩा है, ताकि युवा आत्मनिर्भर बन सकें। कुलपति ने बताया कि ये परियोजनाएं पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन और स्वरोजगार को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी तथा विद्यार्थियों और किसानों के लिए सीखने के नए अवसर उपलब्ध कराएंगी।

27 नक्षत्र

भारतीय ज्योतिष में नक्षत्र आकाश के वे 27 भाग हैं, जिनसे होकर चंद्रमा अपनी परिक्रमा के दौरान गुजरता है। प्रत्येक नक्षत्र का अपना अलग नाम, महत्व और प्रतीक माना जाता है। प्राचीन भारतीय परंपरा में नक्षत्रों का संबंध प्रकृति, ऋतुओं, मानव जीवन और विभिन्न वृक्षों-पौधों से जोड़ा गया है।

माना जाता है कि हर नक्षत्र एक विशेष ऊर्जा और गुण का प्रतिनिधित्व करता है। इसी अवधारणा के आधार पर नक्षत्र वाटिका विकसित की जाती है, जहां 27 नक्षत्रों से संबंधित पौधों और वृक्षों का रोपण किया जाता है। इससे लोगों को भारतीय ज्ञान परंपरा, जैव विविधता और पर्यावरण संरक्षण के बारे में जानकारी मिलती है ।

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