पत्थर की लकीर होती है इन चेलों की भविष्यवाणी, आ गया पवित्र रस्म अदा करने का वक्त

--Advertisement--

हिमाचल की पारंपरिक देव संस्कृति से जुड़ी खास रस्म का समय आ गया है। चेलों की भविष्यवाणी और पवित्र रस्म को लेकर लोगों में उत्सुकता बनी हुई है।

चम्बा – भूषण गुरुंग 

ऐतिहासिक एवं पवित्र मणिमहेश यात्रा के तहत सदियों पुरानी परंपरा का निर्वहन करते हुए त्रिलोचन महादेव के वंशज एवं संचूई के शिव चेले चौरासी मंदिर परिसर में विराजमान हो गए हैं।

पारंपरिक वेशभूषा में सजे ये शिव चेले अगले दो दिन तक चौरासी परिसर में बैठकर देश-प्रदेश से आने वाले शिव भक्तों को अपना आशीर्वाद प्रदान करेंगे और उनकी सुख-समृद्धि की कामना करेंगे।

स्थानीय मान्यताओं के अनुसार इन चेलों द्वारा भक्तों को दिए जाने वाले आशीर्वाद और भविष्यवाणियों को पत्थर की लकीर माना जाता है, जो भगवान शिव और त्रिलोचन महादेव की कृपा का ही प्रतिफल है।

दो दिनों तक चौरासी परिसर में शिव भक्तों को दर्शन व आशीर्वाद देने के उपरांत संचुई के चेले 17 सितंबर को पवित्र मणिमहेश डल झील के लिए प्रस्थान करेंगे।

यात्रा मार्ग में चेले हड़सर और धनछो में रात्रि विश्राम करेंगे, जिसके बाद 18 सितंबर को मणिमहेश स्थित डल झील पहुंचकर पारंपरिक डल तोडऩे की पवित्र रस्म अदा करेंगे।

मान्यता है कि शिव चेलों द्वारा डल झील पार करने और रस्म पूरी करने के बाद ही पवित्र जल में अलौकिक शक्ति का संचार होता है, जिसके उपरांत शुरू होने वाले महास्नान में डुबकी लगाकर श्रद्धालु अपने समस्त कष्टों व पापों से मुक्ति पाते हैं।

--Advertisement--
--Advertisement--

Share post:

Subscribe

--Advertisement--

Popular

More like this
Related

शाहपुर प्रेस क्लब का गठन, आशीष पटियाल बने अध्यक्ष; देखें पूरी कार्यकारिणी

शाहपुर प्रेस क्लब का सर्वसम्मति से गठन हुआ, आशीष...

हिमाचल: हमीरपुर में 2 नाबालिग अचानक लापता, परिवार परेशान; पुलिस ने शुरू की तलाश

हमीरपुर में दो नाबालिगों के अचानक लापता होने का...