हिमखबर डेस्क
पश्चिम एशिया में युद्ध के असर से हिमाचल प्रदेश भी अछूता नहीं है। एलपीजी की मांग और आपूर्ति में अनिश्चितता के बीच इन्फ्रारेड इंडक्शन लोगों के लिए राहत बन रहा है। प्रदेशभर में घरों से लेकर होटलों तक खाना पकाने के लिए इसका प्रयोग बढ़ गया है। मांग बढ़ने से कंपनियों के पास स्टाक कम पड़ गया है।
मंडी व अन्य जिलों में पहले इन्फ्रारेड इंडक्शन की रोजाना बिक्री 50 से 60 यूनिट के आसपास रहती थी। अब यह आंकड़ा 300 से 400 यूनिट प्रतिदिन तक पहुंच गया है। घरेलू उपयोग के माडल 2000 से 5000 रुपये तक उपलब्ध हैं। होटल और ढाबों के लिए भारी क्षमता वाले माडल 10,000 रुपये से अधिक में बिक रहे हैं।
होटल व्यवसाय में भी इन्फ्रारेड इंडक्शन और बिजली के उपकरणों पर निर्भरता बढ़ी है। इसका सीधा असर प्रदेश की बिजली खपत पर पड़ा है। 24 मार्च को प्रदेश में बिजली की मांग 365 लाख यूनिट तक पहुंच गई। 22 मार्च को मांग 345 लाख जबकि एक मार्च को मांग 323 लाख यूनिट थी।
गैस संकट का असर नई बिक्री तक सीमित नहीं है। स्टोर रूम में रखे पुराने स्टोव और खराब पड़े इंडक्शन भी बाहर आ गए हैं। मंडी शहर की इंदिरा मार्केट के मैकेनिकों के पास पहले सप्ताह में एक-दो स्टोव मरम्मत के लिए आते थे, लेकिन अब रोजाना 30 से 40 स्टोव पहुंच रहे हैं। इंडक्शन की मरम्मत के लिए भी उपभोक्ताओं की लंबी कतार लग रही है। केरोसिन न मिलने के कारण कई लोग डीजल का प्रयोग कर रहे हैं।
इन्फ्रारेड इंडक्शन में किसी विशेष प्रकार के बर्तन की बाध्यता नहीं होती है। इस पर एल्यूमीनियम, स्टील, कांच या मिट्टी के बर्तन भी आसानी से इस्तेमाल किए जा सकते हैं। यह बर्तन को समान रूप से गर्म करता है। इसमें गैस चूल्हे की तरह नाब के जरिए तापमान नियंत्रित करना आसान होता है। बिना तवे से रोटी बनाई जा सकती है।

