शिमला – नितिश पठानियां
सुक्खू सरकार के लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने बुधवार को मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। बुधवार को राज्य विधानसभा परिसर में आयोजित प्रेसवार्ता में उन्होंने इसका एलान किया। उन्होंने कहा कि जनता के प्रति मेरी जावाबदेही है।
उन्होंने कहा कि एक साल के घटनाक्रम में विधायकों की अनदेखी हुई, आवाज दबाई गई। उन्होंने कहा कि शिलान्यास मामले में मेरे विभाग के अफसरों को नोटिस दिए गए। वह वीरभद्र सिंह के कदमों पर चल रहे हैं। प्रियंका गांधी, खरगे को दो दिन के घटनाक्रम की जानकारी दे दी है और अब हाईकमान को फैसला लेना है।
मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा, ‘हमने पार्टी का हमेशा साथ दिया है… मैं आज सिर्फ इतना कहना चाहूंगा कि वर्तमान समय में मेरा इस सरकार में बने रहना ठीक नहीं है। मैंने यह निर्णय लिया है कि मैं मंत्रीमंडल से इस्तीफा दे रहा हूं।’
साथ ही कहा है कि मुझे दुःख के साथ कहना पड़ रहा है कि मुझे एक मंत्री के तौर पर अपमानित करने का काम किया गया है, जिस तरह के संदेश विभाग में भेजे जाते हैं, हमें कमजोर करने की कोशिश की गई। सरकार सभी के सामूहिक प्रयास से बनी थी…मैं किसी भी दबाव में नहीं आने वाला नहीं।
भावुक होकर रोने लगे विक्रमादित्य सिंह
पत्रकार वार्ता में विक्रमादित्य सिंह भावुक होकर रोने लगे। कहा कि वीरभद्र छह बार सीएम रहे, लेकिन रिज पर उनकी प्रतिमा के लिए जगह नहीं मिली। इससे आहत हूं। उन्होंने कहा कि जनता से चर्चा के बाद आगामी फैसला लूंगा और कहा कि राज्यपाल को इस्तीफा देने जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार में मंत्री रहते हुए भी उन्हें कई बार नीचा दिखाने की कोशिश की गई। हाल ही में घटी शिलान्यास पत्रिकाएं तोड़ने की घटना भी इसी से जुड़ी हुई है।

