
कोटला- स्वयंम
राजनीति दलों को अपनी लोकप्रियता की सही परख करने के लिए जनता को रैलियों में आने के लिए अपने विवेक पर छोड़ दिया जाए। पूर्व पंचायत समिति सदस्य एवं वर्तमान उपप्रधान पंचायत डोल भटहेड़ साधू राम राणा ने प्रेस वार्ता में कहा कि राजनीति दलों की रैलियों में बह समय भी देखा गया है कि जब लोगों को अपनी विचारधारा के राजनीति दल की रैली का पता केवल अखबार में छपी खबर से ही चलता था और लोग मीलों दूर पैदल ही नेताओं की जनसभाओं एवं रैलियों में पहुंच जाते थे और जमीन पर बैठकर ही कार्यक्रमों में शिरकत करते थे।
उस समय रैलियों में नाश्ता खाना चाय आदि तो दूर की बात थी पीने के पानी की भी कोई व्यवस्था नहीं होती थी।उस समय राजनीति दलों के नेता भी बिना वेतन भत्तों एवं पैंशन के ही काम करते थे और उसी भाव को लेकर कार्यकर्ता एवं जनता भी अपनी विचारधारा के नेताओं के प्रति बिना किसी लोभ लालच के ही जुड़ाव रहता था, लेकिन आज की राजनीति आधुनिक युग में प्रवेश कर चुकी है।
हर राजनीति दल जनसभाओं एवं रैलियों का आयोजन करने से पहले धुंआधार प्रचार करते हैं और फिर रैलियों में भीड़ जुटाने केलिए अपने आकाओं को खुश करने केलिए चाय नाश्ता एवं गाड़ियों में ले जाने के इलावा बड़े बड़े आधुनिक पंडालों की व्यवस्था करते हैं और इससे भी बात न बनती दिखे तो उस दिन की दिहाड़ी देने की भी पेशकश करते हैं जबकि इस प्रकार के हथकंडों से रैलियों में इकट्ठी की गई भीड़ कभी भी वोटों में तब्दील होती नहीं होती दिखी है उल्टा सरकारी व्यवस्था चरमरा जाती है।
अतः सभी राजनीति दलों को राजनीति व्यवस्था में सुधार लाने केलिए या तो बड़ी बड़ी रैलियां को बंद कर देना चाहिए या फिर इन रैलियों में जनता को अपने विवेक पर आने के लिए छोड़ देना चाहिए ताकि हर राजनीति दल को अपने जनाधार की सही परख हो सके।
