आईजीएमसी में 12वां इंडियन ऑर्गन डोनेशन दिवस मनाया गया

--Advertisement--

Image

शिमला- जसपाल ठाकुर 

शिमला के इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) में शनिवार को स्टेट ऑर्गन एंड टिशु ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन (सोटो) की ओर से 12वां इंडियन ऑर्गन डोनेशन दिवस मनाया गया।

इस मौके पर आईजीएमसी के प्रधानाचार्य डॉ सुरेंद्र सिंह विशेष रूप से उपस्थित रहे। अंगदान के प्रति छात्रों को प्रेरित करते हुए प्रधानाचार्य ने सबसे पहले ऑर्गन डोनेशन का शपथ पत्र भरा। कार्यक्रम में आई बैंक के ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉ यशपाल रांटा ने एमबीबीएस के छात्रों को ऑर्गन डोनेशन के बारे में जागरूक किया।

उन्होंने बताया कि किसी व्यक्ति का जीवन बचाने के लिए डॉक्टर होना ही जरूरी नहीं है बल्कि लोग मृत्यु के बाद भी अपने अंगदान करके जरूरतमंद का जीवन बचा सकते हैं। उन्होंने बताया कि साल 1954 में पहली बार ऑर्गन ट्रांसप्लांट किया गया था।

उन्होंने बताया कि अंगदान करने वाला व्यक्ति ऑर्गन के जरिए 8 लोगों का जीवन बचा सकते हैं। जीवित अंगदाता किडनी, लीवर का भाग, फेफड़े का भाग और बोन मैरो दान दे सकते हैं, वहीं मृत्युदाता यकृत, गुर्दे, फेफड़े, पेनक्रियाज, कॉर्निया और त्वचा दान कर सकते हैं।

उन्होंने बताया कि हृदय को 4 से 6 घंटे, फेफड़े को 4 से 8 घंटे, इंटेस्टाइन को 6 से 10 घंटे, यकृत को 12 से 15 घंटे, पेनक्रियाज को 12 से 14 घंटे और किडनी को 24 से 48 घंटे के अंतराल में जीवित व्यक्ति के शरीर में स्थानांतरित किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों और दुर्घटनाग्रस्त मरीजों के ब्रेन डेड होने के बाद यह प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।

अस्पताल में मरीज को निगरानी में रखा जाता है और विशेष कमेटी मरीज को ब्रेन डेड घोषित करती है। मृतक के अंग लेने के लिए पारिवारिक जनों की सहमति बेहद जरूरी रहती है। उन्होंने जानकारी देते हुए कहा कि साल 2010 से अस्पताल में आई बैंक खोला गया है, इसके तहत मौजूदा समय तक सैकड़ों मरीजों ने आंखें दान करके जरूरतमंद मरीजों के जीवन में रोशनी भर दी है।

उन्होंने छात्रों से अनुरोध करते हुए कहा कि समाज के विभिन्न वर्गों में अंगदान को लेकर जागरूकता फैलाएं ताकि जरूरतमंद को नई जिंदगी मिल सके । उन्होंने बताया कि देश भर में प्रतिदिन 6000 मरीज समय पर ऑर्गन ना मिलने के कारण मरते हैं जोकि बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। कार्यक्रम में एमबीबीएस प्रथम वर्ष के 120 छात्रों ने बढ़ चढ़कर भाग लिया।

कार्यक्रम के अंत में कॉलेज प्रधानाचार्य ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि समाज में अंगदान को लेकर अलग-अलग भ्रांतियां फैली हुई है। भ्रांतियों को समय रहते दूर किया जाना चाहिए और अधिक से अधिक लोगों को इसके महत्व के बारे में जानकारी दी जानी चाहिए। इससे प्रभावित मरीजों का सर्वाइवल रेट बढ़ सकता है ।

आमतौर पर ऑर्गन ट्रांसप्लांट वाले लाभार्थी मरीज सहजता से 20 से 25 साल तक का जीवन जी पाते हैं। उन्होंने बताया कि अंगों की तस्करी के अपराध को रोकने के लिए सरकार की ओर से विशेष कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने आई बैंक व सोटो द्वारा किए गए प्रयास की सराहना की।

कार्यक्रम में सोटो के नोडल अधिकारी डॉ पुनीत महाजन, एनोटोमी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ अंजू प्रताप, सोटो ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर नरेश, डाटा एंट्री ऑपरेटर भारती कश्यप मौजूद रही।

--Advertisement--
--Advertisement--

Share post:

Subscribe

--Advertisement--

Popular

More like this
Related

दो तीन हफ्ते में खत्म हो जाएगा युद्ध, धड़ाम से गिरेंगी ईंधन की कीमतें, ट्रंप का बड़ा बयान

हिमखबर डेस्क  अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया...

सतलुज की लहरों में समा रही थी जिंदगी, फिर पुलिस वाले ने किया ऐसा काम….हर कोई कर रहा सलाम

हिमखबर डेस्क  शिमला जिले के रामपुर में हिमाचल पुलिस के...