धुंध बनी मछलियों की ढाल…झील में फंसे मछुआरे

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ज्वाली, माधवी

पौंग झील में पहले दिन कई मछुआरे खाली हाथ लौटे। बुधवार सुबह पड़ी धुंध ने मछुआरों का मछली पकड़ने का सारा खेल बिगाड़ दिया। पौंग झील में बुधवार को सभी 15 फिशरी सोसायटियों में कुल 20 क्विंटल 31 किलो 500 ग्राम मछली पकड़ी गई। गुगलाडा में सबसे अधिक 389.1 किलोग्राम व जंबलबस्सी में सबसे कम 10.3 किलोग्राम मछली पकड़ी गई।

पौंग झील से सोमवार को मछली पकड़ने पर लगा प्रतिबंध हटने के बाद मंगलवार को सुबह मछुआरों ने दलदल में फंसी किश्तियों को कड़ी मशक्कत के बाद निकाल कर मरम्मत के बाद शाम को झील में जाल बिछा दिए।

मछुआरों को उम्मीद थी कि 37 दिन बाद झील में जाल बिछाए हैं, तो अच्छी मात्रा में मछली जाल में फंसेगी, लेकिन मछुआरे सुबह करीब छह बजे जैसे ही जाल निकालने किश्तियों से झील में उतरे तो अचानक धुंध पड़ गई और झील में भटक गए। दोपहर 12 बजे तक मछुआरे झील में ही फंसे रहे।

धुंध हटने के बाद जब जाल निकाले तो कई मछुआरे खाली हाथ ही वापस लौट आए। पौंग झील के फिशरी इंस्पेक्टर मनजीत ने बताया कि पौंगे झील की 15 सोसायटियों में 2300 मछुआरे मछली पकड़ कर परिवार पालते हैं।

कहां, कितनी मछली पकड़ी

देहरा में 58.1 किलोग्राम

हरिपुर में 15.1 किलोग्राम

नंदपुर में 17.2 किलोग्राम

नगरोटा सूरियां में 147.9 किलोग्राम

हरसर में 53.5 किलोग्राम

जवाली में 189.7 किलोग्राम

गुगलाड़ा में 389.1 किलोग्राम

सिहाल में 160.6 किलोग्राम

धमेटा में 147.9 किलोग्राम

खटियाड़ में 268.1 किलोग्राम

स्थाणा में 79.1 किलोग्राम

वरनोली में 293.3 किलोग्राम

स्यूल खड्ड में 140.8 किलोग्राम

डाडासीबा में 60.5 किलोग्राम

जम्बलबस्सी में 10.3 किलोग्राम

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