हिमख़बर डेस्क
हिमाचल प्रदेश पुलिस ने 20 और 21 जुलाई, 2026 को चिट्टा-मुक्त हिमाचल अभियान के तहत पूरे प्रदेश में विशेष इंटर-स्टेट और इंटर-डिस्ट्रिक्ट नाका अभियान चलाया।
इस दौरान एसटीएफ और जिला पुलिस की संयुक्त टीमों ने 159 चिन्हित स्थानों पर नाकाबंदी कर 12,350 वाहनों की गहन जांच की।
हालांकि इतने बड़े अभियान के बावजूद पुलिस को केवल 350 ग्राम चरस बरामद हुई और एनडीपीएस एक्ट के तहत सिर्फ एक मामला दर्ज किया गया, जिसमें चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इसे लेकर अभियान की प्रभावशीलता पर सवाल उठने लगे हैं।
पुलिस के अनुसार अभियान का उद्देश्य नशा तस्करों के नेटवर्क को तोडऩा और युवाओं को चिट्टे व अन्य नशीले पदार्थों की गिरफ्त से बचाना है।
अभियान के दौरान संदिग्ध गतिविधियों पर विशेष नजर रखी गई और आधुनिक तकनीकी निगरानी के साथ कार्रवाई की गई। अभियान के दौरान यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई।
मोटर वाहन अधिनियम के तहत 891 चालान कर 33 हजार रुपए जुर्माना वसूला गया। वहीं सीओटीपीए अधिनियम के तहत 237 चालान कर 7 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया।
इसके अलावा खनन अधिनियम के तहत पांच चालान भी किए गए। पुलिस ने बताया कि अभियान के दौरान संदिग्ध पाए गए 18 लोगों के रक्त और मूत्र के नमूने भी जांच के लिए लिए गए हैं, ताकि वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर आगे कानूनी कार्रवाई की जा सके।
हालांकि, इतने बड़े स्तर पर चलाए गए अभियान में केवल 350 ग्राम चरस की बरामदगी और एक ही एनडीपीएस मामला सामने आने से विपक्ष और आम लोगों के बीच यह चर्चा भी शुरू हो गई है कि क्या चिट्टा-मुक्त हिमाचल अभियान केवल औपचारिकता बनकर रह गया है या फिर नशा तस्करों तक पहुंचने के लिए और अधिक प्रभावी रणनीति की आवश्यकता है।

