हिमख़बर डेस्क
किन्नौर जनपद की सांगला वैली में बादल फटने के बाद मस्तरंग के पास गारगे नाले में आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई।
बाढ़ के साथ आए मलबे और विशाल बोल्डरों ने भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के कैंप समेत आसपास के क्षेत्रों को व्यापक नुकसान पहुंचाया।
प्रारंभिक आकलन के अनुसार इस प्राकृतिक आपदा से करीब 5 करोड़ रुपये की क्षति हुई है। राहत की बात यह रही कि इस घटना में कोई जनहानि नहीं हुई, जबकि स्थानीय ग्रामीणों ने जवानों और फंसे पर्यटकों की मदद कर मानवता की मिसाल पेश की।
बाढ़ का सबसे अधिक असर मस्तरंग स्थित आईटीबीपी कैंप पर पड़ा। करीब दो हेक्टेयर क्षेत्र में फैले कैंप परिसर में मलबा और बड़े-बड़े बोल्डर घुस आए, जिससे स्टोर, कार्यालय, ईंधन भंडार, एटीएम, ऑफिसर्स मैस और आवासीय बैरकों को भारी नुकसान पहुंचा।
इसके अलावा आईटीबीपी की एक बस, एक स्कॉर्पियो वाहन और एक जवान की निजी कार भी क्षतिग्रस्त हो गई। कैंप का हेलीपैड, सिग्नल सेंटर और लगभग 200 मीटर लंबी आंतरिक सड़क भी बाढ़ की चपेट में आ गई।
बाढ़ का असर सीमा सड़क संगठन (BRO) के अधीन छितकुल-सांगला मार्ग पर भी पड़ा। सड़क का लगभग 60 मीटर हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया था, जिससे यातायात पूरी तरह बाधित हो गया।
हालांकि, बीआरओ की टीमों ने लगातार करीब 20 घंटे तक राहत एवं मरम्मत कार्य चलाकर मार्ग को दोबारा बहाल कर दिया।
इस दौरान छितकुल में फंसे पर्यटकों को सुरक्षित निकालने के लिए स्थानीय ग्रामीणों ने साहसिक प्रयास किए। रकछम पंचायत के लोगों ने नाले के ऊपर पेड़ का सहारा लेकर पर्यटकों को सुरक्षित बाहर निकाला और आईटीबीपी के जवानों की भी हरसंभव मदद की।
बाढ़ से रकछम गांव के आत्माराम, इंद्र भगत और राजभगत की नकदी फसलें भी बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। प्रशासन ने मौके का निरीक्षण कर नुकसान का आकलन किया।
अधिकारियों के अनुसार आईटीबीपी, बीआरओ और निजी संपत्तियों को मिलाकर करीब 5 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं पुनर्बहाली कार्य तेज कर दिए हैं।

