हिमखबर डेस्क
जिला सोलन की नालागढ़ उपमंडल की बवासनी पंचायत में इस बार पंचायती राज चुनाव के बावजूद प्रधान पद के लिए मतदान नहीं हो पाएगा। पंचायत में ओबीसी वर्ग का कोई परिवार निवास नहीं करता, जबकि प्रधान पद ओबीसी महिला के लिए आरक्षित कर दिया गया है।
ऐसे में इस श्रेणी से कोई भी पात्र उम्मीदवार सामने नहीं आया और पंचायत में प्रधान पद का चुनाव फिलहाल टल गया है। अब इस पद के लिए छह माह बाद दोबारा चुनाव प्रक्रिया करवाई जाएगी। इस पूरे मामले ने पंचायतों में आरक्षण रोस्टर तय करने की प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ग्रामीणों में इस बात को लेकर नाराजगी है कि जिस पंचायत में वर्तमान में ओबीसी वर्ग का एक भी परिवार नहीं है, वहां प्रधान पद उसी वर्ग के लिए आरक्षित कर दिया गया। पूर्व विधायक केएल ठाकुर ने इसे प्रशासनिक चूक बताते हुए कहा कि पहले भी बवासनी पंचायत में इसी तरह की स्थिति बनी थी, लेकिन उसके बावजूद सुधार नहीं किया गया।
उपायुक्त एवं जिला निर्वाचन अधिकारी कहा कि बवासनी पंचायत में ओबीसी परिवार न होने के कारण प्रधान पद का चुनाव अभी संभव नहीं हो पाएगा। उन्होंने कहा कि चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद आरक्षण श्रेणी में बदलाव करने से आसपास की पंचायतों का पूरा आरक्षण रोस्टर प्रभावित हो सकता था, इसलिए मौजूदा चरण में परिवर्तन नहीं किया गया। उन्होंने बताया कि अब इस पद के लिए छह माह बाद चुनाव करवाया जाएगा।
जानकारी के अनुसार बवासनी पंचायत की कुल आबादी 3,234 है। वर्ष 2020 में यहां प्रधान पद सामान्य महिला के लिए आरक्षित था, जबकि वर्ष 2015 में यह सीट अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित रही थी। इस बार आरक्षण रोस्टर में इसे ओबीसी महिला श्रेणी में डाल दिया गया, जिससे विवाद खड़ा हो गया।
30 साल पुराने आंकड़ों पर फंस गया पंचायत इलेक्शन
बवासनी पंचायत में प्रधान पद के आरक्षण को लेकर विवाद की मुख्य वजह वर्ष 1995 की ओबीसी आयोग रिपोर्टहै। रिपोर्ट में पंचायत में 1235 ओबीसी आबादी दर्ज थी, जबकि वर्तमान में पंचायत में ओबीसी वर्ग का कोई परिवार नहीं रहता। पुराने आंकड़ों के आधार पर आरक्षण लागू होने से प्रधान पद के लिए कोई पात्र उम्मीदवार ही नहीं मिला और अब पंचायत में प्रधान पद का चुनाव टल गया है।

