एक क्लिक में समझें हिमाचल बजट: किसे क्या मिला, क्या हैं बड़ी घोषणाएं

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हिमखबर डेस्क 

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने शनिवार को विधानसभा में वर्ष 2026–27 का 54,928 करोड़ रुपये का आम बजट पेश किया। पिछले वित्त वर्ष की तुलना में यह बजट करीब 3,586 करोड़ रुपये कम है।

मुख्यमंत्री ने बजट का आकार घटाने का प्रमुख कारण केंद्र से मिलने वाली राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) की समाप्ति को बताया और कहा कि राज्य की वित्तीय स्थिति को संतुलित रखने के लिए कई कठिन लेकिन जरूरी फैसले लिए गए हैं।

मुख्यमंत्री के पास वित्त विभाग का जिम्मा होने के कारण यह उनका बतौर वित्त मंत्री लगातार चौथा बजट था। बजट में अनुमान लगाया गया है कि वर्ष 2026–27 में राज्य की राजस्व प्राप्तियां 40,361 करोड़ रुपये और राजस्व व्यय 46,938 करोड़ रुपये रहेगा, जिससे 6,577 करोड़ रुपये का राजस्व घाटा अनुमानित है।

इसी तरह 9,698 करोड़ रुपये का राजकोषीय घाटा रहने का अनुमान है, जो प्रदेश के सकल घरेलू उत्पाद का 3.49 प्रतिशत है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि बजट के हर 100 रुपये में से 27 रुपये वेतन, 21 रुपये पेंशन, 9 रुपये ब्याज अदायगी, 9 रुपये ऋण अदायगी और 10 रुपये स्वायत्त संस्थानों को अनुदान के रूप में खर्च होंगे, जबकि शेष 20 रुपये विकास और अन्य कार्यों पर खर्च किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि सरकार ने इस बार ग्रामीण अर्थव्यवस्था, कृषि और सामाजिक सुरक्षा को प्राथमिकता दी है।

राज्य की कमजोर आर्थिक स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री ने बड़ा निर्णय लेते हुए अपने वेतन का 50 प्रतिशत अगले छह महीने के लिए स्थगित करने की घोषणा की।

इसके साथ ही उपमुख्यमंत्री और मंत्रियों का 30 प्रतिशत तथा विधायकों का 20 प्रतिशत वेतन भी छह महीने के लिए स्थगित रहेगा।

निगमों और बोर्डों के अध्यक्षों, उपाध्यक्षों, सलाहकारों और ओएसडी का 20 प्रतिशत वेतन भी इसी अवधि के लिए स्थगित किया गया है।

वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों में मुख्य सचिव, अतिरिक्त मुख्य सचिव और प्रधान सचिवों का 30 प्रतिशत वेतन स्थगित रहेगा, जबकि सचिवों से लेकर विभागाध्यक्षों तक के अधिकारियों का 20 प्रतिशत वेतन छह महीने के लिए रोका जाएगा।

पुलिस विभाग में डीजीपी और अतिरिक्त डीजीपी का 30 प्रतिशत तथा आईजी से एसपी स्तर तक के अधिकारियों का 20 प्रतिशत वेतन स्थगित रहेगा।

वन विभाग में भी पीसीसीएफ और अतिरिक्त पीसीसीएफ का 30 प्रतिशत तथा सीसीएफ से डीएफओ स्तर तक के अधिकारियों का 20 प्रतिशत वेतन स्थगित रहेगा।

इसके अलावा ग्रुप-ए और ग्रुप-बी के राजपत्रित अधिकारियों के वेतन का 3 प्रतिशत हिस्सा भी छह महीने के लिए स्थगित रहेगा। हालांकि ग्रुप-सी और ग्रुप-डी कर्मचारियों के वेतन में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह अस्थायी व्यवस्था है और आर्थिक स्थिति सुधरने पर यह राशि वापस कर दी जाएगी। आर्थिक चुनौतियों के बावजूद सरकार ने कई सामाजिक और रोजगार से जुड़ी घोषणाएं भी की हैं।

पुलिस विभाग में एक हजार कांस्टेबलों की भर्ती की जाएगी और अन्य खाली पद भी भरे जाएंगे। पेंशनरों तथा तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के वेतन और पेंशन में किसी तरह की कटौती नहीं की गई है।

वर्ष 2016 से दिसंबर 2021 के बीच सेवानिवृत्त कर्मचारियों को लीव इनकैशमेंट और ग्रेच्युटी का भुगतान करने की घोषणा की गई है, जबकि 2016 से पहले सेवानिवृत्त कर्मचारियों के परिवारों को पेंशन एरियर देने का भी ऐलान किया गया है।

सरकार ने आंगनबाड़ी और मिनी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सिलाई शिक्षिकाओं, मिड-डे मील वर्करों, पैरा फिटर, राजस्व चौकीदार, लंबरदार, एसएमसी और आईटी शिक्षकों, एसपीओ तथा पार्ट-टाइम मल्टी-टास्क वर्करों सहित कई श्रेणियों के पैरा कर्मचारियों के मानदेय में बढ़ोतरी की घोषणा भी की है।

विधायकों की ऐच्छिक निधि में एक लाख रुपये की बढ़ोतरी की गई है और विधायक प्राथमिकता योजनाओं की सीमा 200 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 225 करोड़ रुपये कर दी गई है। हालांकि विधायक निधि को 220 करोड़ रुपये से घटाकर 110 करोड़ रुपये करने की घोषणा की गई है।

मुख्यमंत्री ने बजट भाषण के दौरान कहा कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए सरकार ग्रामीण विकास और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं पर विशेष ध्यान दे रही है।

उन्होंने एक लाख अति गरीब परिवारों की महिलाओं को इंदिरा गांधी प्यारी बहना सम्मान निधि के तहत 1,500 रुपये प्रतिमाह देने की घोषणा की। इसके अलावा 27 हजार गरीब परिवारों को कच्चे घरों की जगह पक्के मकान उपलब्ध कराने की योजना भी बजट में शामिल की गई है।

दूध उत्पादकों को राहत देते हुए सरकार ने गाय और भैंस के दूध के खरीद मूल्य में 10-10 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की घोषणा की है। दिव्यांग पेंशन को 1,700 रुपये से बढ़ाकर 3,000 रुपये प्रतिमाह किया गया है और आंगनबाड़ी सहित कई अन्य श्रेणियों की पेंशन में भी बढ़ोतरी की गई है।

मुख्यमंत्री ने बजट भाषण में घोषणा की कि प्रदेश के दिहाड़ीदारों की दैनिक मजदूरी में 25 रुपये की बढ़ोतरी की गई है, जिसके बाद अब उन्हें 450 रुपये प्रतिदिन दिहाड़ी मिलेगी। इसके अलावा आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए न्यूनतम मासिक वेतन 13,750 रुपये निर्धारित किया गया है।

बजट में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय में 1,000 रुपये प्रतिमाह की बढ़ोतरी की गई है, जिसके बाद अब उन्हें 11,500 रुपये प्रतिमाह मिलेंगे।

इसी तरह मिनी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय बढ़ाकर 8,300 रुपये प्रतिमाह कर दिया गया है। आंगनबाड़ी सहायिकाओं और आशा वर्करों के मानदेय में भी 1,000 रुपये की बढ़ोतरी की गई है, जिसके बाद अब उन्हें 6,800 रुपये प्रतिमाह मिलेंगे। सिलाई शिक्षकों के मासिक मानदेय में भी 1,000 रुपये की बढ़ोतरी की घोषणा की गई है।

इसके अलावा मिड-डे मील वर्करों के मानदेय में 500 रुपये प्रतिमाह की बढ़ोतरी की गई है। जल शक्ति विभाग और शिक्षा विभाग के वाटर कैरियर, जल शक्ति और लोक निर्माण विभाग के मल्टी पर्पस वर्करों, पैरा फिटर, पंप ऑपरेटर, पंचायत चौकीदार, राजस्व चौकीदार, राजस्व लंबरदार, एसएमसी शिक्षक, आईटी शिक्षक, एसपीओ और पार्ट टाइम मल्टी टास्क वर्करों के मानदेय में भी 500 रुपये प्रतिमाह की बढ़ोतरी की गई है।

स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र को भी बजट में प्राथमिकता दी गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अगले वित्त वर्ष में प्रदेश में 150 नए सीबीएसई स्कूल खोले जाएंगे और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए हजारों करोड़ रुपये की योजनाएं लागू की जाएंगी।

मुख्यमंत्री ने हिमाचल के लिए नई टाउनशिप विकसित करने की योजना का भी ऐलान किया। इनमें हिम-चंडीगढ़, हिम-पंचकूला और कांगड़ा में धौलाधार की तलहटी में नई टाउनशिप विकसित करने की योजना शामिल है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश की आर्थिक स्थिति चुनौतीपूर्ण है, लेकिन सरकार का प्रयास है कि जनता को जरूरी सेवाएं समय पर मिलती रहें और विकास कार्य प्रभावित न हों। मुख्यमंत्री ने न्यायपालिका और सभी कर्मचारियों से भी राज्य हित में सहयोग की अपील की।

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