जनसुनवाई पूरी, जल्द तय होंगी बिजली की नई दरें, बोर्ड ने प्रति यूनिट 10 पैसे बढ़ाने का रखा है प्रस्ताव

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इस महीने नए टैरिफ की घोषणा करेगा आयोग, बोर्ड ने प्रति यूनिट 10 पैसे बढ़ाने का रखा है प्रस्ताव

हिमखबर डेस्क

हिमाचल प्रदेश में बिजली की नई दरों को तय करने की प्रक्रिया अब अंतिम दौर में पहुंच गई है। राज्य विद्युत नियामक आयोग के समक्ष सभी पक्षों की जनसुनवाई पूरी हो चुकी है। आयोग अब प्राप्त सुझावों, आपत्तियों और बिजली बोर्ड की ओर से प्रस्तुत आंकड़ों का अध्ययन कर रहा है, जिसके बाद मार्च माह के अंत तक नियामक आयोग नए बिजली टैरिफ को लेकर घोषणा करेगा। इसे नए वित वर्ष से लागू किया जाएगा।

फिलहाल अब सबकी निगाहें आयोग के निर्णय पर टिकी हुई है। बता दें कि राज्य बिजली बोर्ड ने आगामी वित्त वर्ष के लिए टैरिफ याचिका दायर करते हुए दरों में बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा है। बोर्ड का तर्क है कि बिजली खरीद लागत में लगातार इजाफा हुआ है।

प्रदेश में जल विद्युत उत्पादन होने के बावजूद सर्दियों के दौरान मांग को पूरा करने के लिए बिजली खरीदनी पड़ती है। इसके अलावा ट्रांसमिशन, रखरखाव, वेतन, पेंशन और अन्य प्रशासनिक खर्चों में भी वृद्धि हुई है। लिहाजा बोर्ड के खर्च और राजस्व के अंतर को पूरा करने के लिए 25 पैसे प्रति यूनिट बिजली की दर में बढ़ोतरी की जरूरत है, लेकिन बोर्ड की ओर से प्रति यूनिट दस पैसे तक बढ़ाने का प्रस्ताव आयोग को दिया है।

हालांकि आयोग यह भी देखेगा कि उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ कितना पड़ेगा और क्या किसी श्रेणी को राहत दी जा सकती है। पता चला है कि जनसुनवाई के दौरान घरेलू उपभोक्ताओं, उद्योग संगठनों, होटल कारोबारियों और किसान प्रतिनिधियों ने अपने-अपने पक्ष रखे। पता चला है कि जनसुनवाई के दौरान उपभोक्ता संगठनों ने सुझाव दिया कि लाइन लॉस कम करने और बिजली चोरी रोकने पर अधिक ध्यान दिया जाए, ताकि दर बढ़ाने की आवश्यकता कम पड़े।

उपभोक्ताओं की मांगें

उपभोक्ताओं ने जनसुनवाई के दौरान बिजली टैरिफ को कम करने की बात भी कही है। जाहिर है कि प्रदेश में नए बिजली टैरिफ तय करने से पहले विद्युत नियामक आयोग ने प्रदेश के शिमला, बद्दी और धर्मशाला में फरवरी माह के दौरान जनसुनवाई की है और इस दौरान बिजली टैरिफ को लेकर उपभोक्ताओं की राय जानी है। अब नियामक आयोग सभी तथ्यों की समीक्षा कर अंतिम निर्णय लेगा। बहरहाल प्रदेश के लाखों घरेलू, व्यावसायिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं की नजरें आयोग के फैसले पर टिकी हैं।

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