शिमला – नितिश पठानियां
हिमाचल प्रदेश पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव की दहलीज पर खड़ा है। इस साल दिसंबर में कभी भी इन चुनावों की घोषणा हो सकती है। ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग ने इसकी तैयारियां शुरू कर दी हैं। इस बार चुनाव में उन लोगों के लिए बुरी खबर है, जिन्होंने सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा किया है। ऐसे लोग पंचायती राज संस्थाओं का चुनाव नहीं लड़ सकेंगे।
पंचायती राज विभाग ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा करने वाला कोई भी व्यक्ति चुनाव में हिस्सा नहीं ले सकता। इसके अलावा, जिन लोगों पर पंचायत या सहकारी समितियों (कोऑपरेटिव सोसायटी) की देनदारी बकाया हैं, वो भी चुनाव लड़ने के पात्र नहीं होंगे। पहली बार सहकारी समितियों की देनदारी को अयोग्यता का आधार बनाया गया है। साथ ही, अदालत द्वारा अपराधी घोषित व्यक्ति भी पंचायती राज चुनाव नहीं लड़ सकेगा।
पंचायती राज विभाग अतिरिक्त निदेशक केवल शर्मा के बोल
पंचायती राज विभाग के अतिरिक्त निदेशक केवल शर्मा ने कहा कि अवैध कब्जा करने वाला कोई भी व्यक्ति पंचायती राज संस्थाओं का चुनाव लड़ने के योग्य नहीं होगा। इसके अलावा, पंचायत या सहकारी समिति की देनदारी बकाया होने पर भी उम्मीदवारी मान्य नहीं होगी।
कौन लड़ सकता है चुनाव?
- ग्राम पंचायत के लिए प्रधान, उपप्रधान और वार्ड सदस्यों के चुनाव होते हैं। प्रधान और उपप्रधान का चुनाव लड़ने के लिए दावेदारी जताने वाला व्यक्ति संबंधित पंचायत का वोटर होना जरूरी है। इसी तरह से संबंधित पंचायत का वोटर अपने वार्ड से सदस्य का चुनाव लड़ सकता है।
- पंचायत समिति का चुनाव लड़ने वाला दावेदार संबंधित ब्लॉक के तहत किसी भी पंचायत का वोटर होना चाहिए।
- जिला परिषद सदस्य का चुनाव लड़ने के लिए दावेदार उस जिला परिषद वार्ड का वोटर होना चाहिए।
- पंचायतीराज संस्थाओं का चुनाव लड़ने किए उम्मीदवार की आयु 21 साल होनी चाहिए।
- पंचायतीराज संस्थाओं का वार्ड सदस्य, उप प्रधान, प्रधान, पंचायत समिति सदस्य व जिला परिषद सदस्य का चुनाव लड़ने के लिए शैक्षणिक योग्यता का कोई मापदंड तय नहीं है। निरक्षर व्यक्ति भी पंचायतीराज संस्थाओं का चुनाव लड़ सकता है।

