मोबाइल की लत में बचपन…गलियां सूनी, मैदान वीरान

--Advertisement--

बच्चे एक मिनट भी नहीं छोड़ रहे फोन; ऑनलाइन गेम्स ने कर दी हालत खराब, चिड़चिड़ापन हावी होने से गुस्सैल हुए

चम्बा – भूषण गुरुंग

डिजिटल युग में सोशल मीडिया और मोबाइल की बढ़ती लत ने हर उम्र के लोगों को अपनी गिरफ्त में ले लिया है। खासकर बच्चों और युवाओं में इसका प्रभाव इतना गहरा हो गया है कि वे अब गली-मोहल्लों में खेलकूद से दूर होते जा रहे हैं।

डलहौजी के वरिष्ठ नागरिक प्रेम मैहरा का कहना है कि जहां पहले छुट्टियों में गलियों में क्रिकेट, कबड्डी, खो-खो जैसे खेलों की चहल-पहल रहती थी, वहीं अब मोबाइल स्क्रीन पर आंखें गडाए बच्चे और युवा दिखाई देते हैं। वरिष्ठ लोगों का कहना है कि पहले स्कूलों में छुट्टियां आते ही बच्चे सुबह से शाम तक मैदानों और गलियों में खेलते नजर आते थे, लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। अधिकांश बच्चे और युवा सोशल मीडिया, आनलाइन गेम्स और वीडियो कंटेंट में इतने व्यस्त हो गए हैं कि वे शारीरिक गतिविधियों से दूर होते जा रहे हैं ।

विशेषज्ञों के अनुसार मोबाइल और सोशल मीडिया की अत्यधिक लत न केवल बच्चों के शारीरिक विकास को प्रभावित कर रही है, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक असर डाल रही है। डाक्टरों का कहना है कि लगातार स्क्रीन देखने से आंखों पर दबाव बढ़ रहा है, मोटापे की समस्या बढ़ रही है और बच्चों में एकाकीपन व चिड़चिड़ापन भी देखने को मिल रहा है।

डलहौजी के वरिष्ठ लोगों का मानना है कि बच्चों को मोबाइल की दुनिया से बाहर लाने के लिए अभिभावकों को पहल करनी होगी। उन्हें आउटडोर गेम्स और सामाजिक गतिविधियों में शामिल करने के लिए प्रेरित करना जरूरी है। इसके अलावा, स्कूलों और स्थानीय संगठनों को भी खेलों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रयास करने होंगे, ताकि आने वाली पीढी स्वस्थ और सक्ष्यि जीवनशैली अपना सके। यदि समय रहते इस बदलते परिश्य पर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले वर्षों में पारंपरिक खेल केवल यादों का हिस्सा बनकर रह जाएंगे।

नहीं छोड़ रहे फोन, खाना तक नहीं खा रहे

मोबाइल का नसा बच्चों पर इस कद्र हावी है कि बच्चे एक मिनट भी मोबाइल अपने से दूर नहीं कर रहे हैं। हालत यह है कि जब मां-बाप मोबाइल छीनकर बच्चों को खाना देते हैं तो वे खाना तक नहीं खा रहे हैं। बच्चों के व्यवहार में भी इससे चेंज आ गया है। बच्चे रील्स देखकर चिड़ाचिड़ेपन का शिकार हो रहे हैं। कई बच्चों का नेचर ही बदल गया है। यह समस्या और विकराल होती जा रही है।

--Advertisement--
--Advertisement--

Share post:

Subscribe

--Advertisement--

Popular

More like this
Related

विदेश जाना हुआ महंगा, सरकार ने बढ़ाई पासपोर्ट की आवेदन फीस, री-इश्यू करवाना भी महंगा

हिमखबर डेस्क विदेश मंत्रालय ने पासपोर्ट बनवाने की फीस बढ़ा...

Teacher Eligibility Test: हिमाचल में शिक्षकों को 31 अगस्त से पहले पास करना होगा TET

हिमखबर डेस्क हिमाचल सरकार ने इन सर्विस टीचर्स के लिए शिक्षक...

टांडा मेडिकल कॉलेज का पानी पीने लायक नहीं

हिमखबर डेस्क डाक्टर राजेंद्र प्रसाद राजकीय आयुर्विज्ञान चिकित्सा महाविद्यालय टांडा...