डॉ. रमेश ठाकुर मुख्यअतिथि के रूप में रहे उपस्थित
शिमला – नितिश पठानियां
आज हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला की शोध समिति द्वारा “स्वामी विवेकानंद जी के विचारों का वर्तमान शोध में प्रासंगिकता” पर एक महत्वपूर्ण संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी के मुख्य अतिथि के रूप में प्रसिद्ध शिक्षाविद् डॉक्टर रमेश ठाकुर ने भाग लिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन से हुआ, जो इस आयोजन की आधिकारिक शुरुआत थी। शोध समिति के सह-संयोजक नेक राम जी ने सभी का स्वागत किया और संगोष्ठी में उपस्थित मुख्य अतिथि, शोधार्थियों, और विद्यार्थियों का दिल से अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद जी ने सनातन धर्म को विश्व पटल पर पहचान दी। और उन्होंने विश्व बंधुत्व की आधारशिला रखी।
इसके पश्चात्, मुख्य अतिथि डॉक्टर रमेश ठाकुर ने अपने प्रेरणादायक वक्तव्य में स्वामी विवेकानंद जी के विचारों की महत्ता पर गहन विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने स्वामी विवेकानंद को एक ऐसे महान योगी और विचारक के रूप में चित्रित किया, जिन्होंने न केवल भारत, बल्कि पूरी दुनिया में अपने विचारों से परिवर्तन लाने का कार्य किया।
विशेष रूप से, उन्होंने विवेकानंद जी के 1893 के शिकागो विश्व धार्मिक महासभा में दिए गए ऐतिहासिक भाषण का उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने “अमेरिका के भाईयों और बहनों” शब्दों से धार्मिक एकता और विश्वबंधुत्व का संदेश दिया। यह शब्द आज भी मानवता के संदेश के रूप में प्रतिध्वनित होते हैं।
डॉक्टर रमेश ठाकुर ने स्वामी विवेकानंद के विचारों की वर्तमान संदर्भ में प्रासंगिकता पर भी विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने सर्वांगीण विकास के महत्व को हमेशा प्राथमिकता दी। वे न केवल व्यक्तित्व के मानसिक और आध्यात्मिक विकास की बात करते थे, बल्कि समाज के हर वर्ग, खासकर महिलाओं, के सशक्तिकरण पर भी जोर देते थे।
उनका मानना था कि जब तक महिलाएं आत्मनिर्भर नहीं बनेंगी, तब तक समाज का सही विकास नहीं हो सकता। विवेकानंद जी के विचारों के अनुसार, महिलाओं का उत्थान ही समाज के वास्तविक उत्थान का आधार है। इसके बाद, डॉक्टर रमेश ठाकुर ने “वासुदेव कुटुम्बकम्” के सिद्धांत पर भी चर्चा की, जो स्वामी विवेकानंद जी के मानवतावादी दृष्टिकोण को दर्शाता है।
उन्होंने सभी को यह प्रेरणा दी कि हमें न केवल अपने व्यक्तिगत जीवन में विवेकानंद जी के विचारों को अपनाना चाहिए, बल्कि समाज में व्याप्त असमानताओं और विघटन को समाप्त करने के लिए भी हम सभी को एकजुट होकर कार्य करना चाहिए।
संगोष्ठी के समापन पर शोध समिति के हिंदी विभाग प्रमुख वैभव भारतीय जी ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया। उन्होंने संगोष्ठी के आयोजन में योगदान देने वाले सभी व्यक्तियों का आभार व्यक्त किया और सभी को स्वामी विवेकानंद के जीवन और विचारों से प्रेरित होकर अपने कार्यों में उच्चतम उद्देश्य को अपनाने की अपील की।
उन्होंने यह भी कहा कि हमें केवल विचारों की सराहना नहीं करनी चाहिए, बल्कि उन्हें अपने जीवन में उतारने का प्रयास करना चाहिए, ताकि हम समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकें। इसमें ABVP शिमला विभाग संगठन मंत्री अश्विनी ठाकुर जी, शोध प्रांत सह-संयोजक सर्वेश दीक्षित, काकू राम, आशीष मिश्रा, देवेन्द्र आदि सहित लगभग 40 लोगों ने भाग लिया।
यह संगोष्ठी न केवल स्वामी विवेकानंद जी के विचारों को पुनः समझने और आत्मसात करने का अवसर बनी, बल्कि यह युवा पीढ़ी के लिए एक प्रेरणा स्रोत भी साबित हुई।

