ऐसी जगह को ठीक करने की मांग भी स्थानीय लोगों के समक्ष मांग उठाने लगे हैं। जिला प्रशासन ने आम लोगों से वाहन सुरक्षित तरीके से चलाने व चलाने वाले लोग फोन का उपयोग चलते समय न करें । ऐसा करने पर कोई भी घटना घटने की संभावना है । साथ ही सैलानियों से भी पहाडिय़ों पर न जाने का आग्रह किया है।
शहर के मल्याणा, चमियाना, भट्ठाकुफर, मिनी कुफ्टाधार सहित अन्य स्थानों पर भारी नुकसान हुआ है। चमियाना में नाले के पास खड़ी तीन गाड़ियां मलबे में दब गईं। मल्याणा में पहाड़ी से बड़ी-बड़ी चट्टानें सड़क किनारे पार्क चार गाड़ियों पर गिर गईं। इससे दो गाड़ियां चकनाचूर हो गईं।
भट्टाकुफर में भूस्खलन से सड़क किनारे पार्क एक कार पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। मिनी कुफ्टाधार का रास्ता मलबा आने से नाले में तब्दील हो गया। शहर की ईदगाह कालोनी में भी नुकसान हुआ है। डंगा गिरने से रास्ता बंद हो गया है। पगोग सड़क पर आए पत्थर और मलबा आने से आवाजाही प्रभावित रही। जुन्गा रोड पर बारिश का पानी घरों में घुस गया। खलीनी में भी भूस्खलन हुआ है।
रिज मैदान पर भी मलबा फैलने से निगम की तैयारियों पर पूरा पानी फेर दिया, हालांकि निगम लंबे समय से शहर में बरसात की तैयारियां कर रहा है। कुछ संवेदनशील स्थानों पर निगम के काम के बेहतर परिणाम मिले, लेकिन शहर के अन्य स्थानों पर मलबे ने लोगों को परेशान कर दिया। अब आने वाले दिनों में निगम को मलबा नालों में न फेंका जाए, इस दिशा में ध्यान देना होगा।
शिमला के रिज मैदान पर आयोजित पुस्तक मेले में सजे स्टालों में रात को बारिश का पानी घुस गया। इसके कारण कई प्रकाशकों की किताबें भी बारिश के कारण खराब हो गई। इसके कारण प्रकाशकों को भी नुकसान उठाना पड़ा है। शुक्रवार सुबह कई प्रकाशन रिज मैदान पर धूप में किताबों को सूखा रहे थे।