अंगुली से पुरानी स्याही मिटी नहीं, तो कैसे होगा नया मतदान

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चुनाव आयोग पहली बार कर रहा विचित्र स्थिति का सामना, लोकसभा के बाद 40 दिन में हो रहे विधानसभा चुनाव

हिमखबर डेस्क

लोकतंत्र के महापर्व में फर्जी मतदान या फिर दो-दो बार मतदान करने जैसी घटनाओं को को रोकने और मतदान की अहमियत को बनाए रखने के लिए चुनाव आयोग विशेष कदम उठाता है। इसलिए वोटिंग के वक्त हर मतदाता की बाएं हाथ की तर्जनी अंगुली पर एक स्याही का निशान लगाया जाता है।

दशकों से यह स्याही का निशान भारत के नागरिकों को यह संदेश देता आ रहा है कि उन्होंने जो मतदान किया है, वह सुरक्षित है और वे दोबारा फर्जी मतदान नहीं कर सकते। चुनाव के दौरान मतदान केंद्र पर मौजूद चुनाव कर्मी मतदाता की अंगुली पर इस नीली स्याही का निशान लगाकर तय कर देते हैं कि न सिर्फ उस नागरिक ने मतदान किया है, बल्कि उसका मतदान का अधिकार सुरक्षित है।

इस स्याही की खासियत यह होती है कि कुछ ही सेकेंड में यह अंगुली के साथ ऐसे चिपक जाती है कि इसे मिटा पाना मुश्किल होता है। इस जिद्दी स्याही का जिक्र इसलिए छिड़ गया है कि हाल ही में जिला हमीरपुर समेत प्रदेश के कुछ अन्य जिलों में लोकसभा के आम चुनाव के साथ विधानसभा के उपचुनाव भी हुए।

उन चुनावों के दौरान यह स्याही मतदाता की अंगुली पर ऐसे लगी है कि लगता नहीं कि 10 जुलाई को जिला हमीरपुर समेत कांगड़ा क देहरा और सोलन के नालागढ़ में होने वाले उपचुनाव तक यह इतनी आसानी से जाएगी। संबंधित विधानसभा क्षेत्र के निर्वाचन अधिकारी भी अभी तक संशय में है कि ऐसी स्थिति में उन्हें क्या करना है।

दरसअल यह स्याही बाएं हाथ की तर्जनी अंगुली पर लगाने का ही प्रावधान होता है। ऐसे में यदि निशान नहीं मिटा तो इसे और किस अंगुली में लगाना है, इसे लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। दरअसल चुनाव के दौरान ड्यूटी दे रहे कुछ स्पेशल मुलाजिमों की दाहिनी हाथ की तर्जनी और मध्य वाली अंगुली पर भी स्याही लगाने का प्रावधान रहता है।

ऐसे में अब यह यक्ष प्रश्न सबके सामने है कि 10 जुलाई तक यदि स्याही का निशान न मिटा तो फिर सुरक्षित चुनाव करवाने के लिए आयोग क्या निर्णय लेगा। पहली जून को लोकसभा चुनावों और कुछ जिलों में विधानसभा के उपचुनावों में वोट डालने वाले मतदाता पहले ही अपनी अंगुली पर यह स्याही लगा चुके हैं। लगभग 40 दिनों के भीतर तीन जिलों के तीन विधानसभा क्षेत्रों में दोबारा उपचुनाव होने जा रहे हैं।

जानकारों की मानें तो मतदान के समय लगाई जाने वाली स्याही लगभग एक महीने से 50 दिन तक हमारी त्वचा और नाखून पर रहती है। जब मतदाता मतदान करने जाएगा, तो उसके लिए चुनाव आयोग क्या प्रावधान करेगा, यह देखने वाली बात होगी।

इलेक्शन कमीशन से अभी तक कोई निर्देश नहीं

हमीरपुर के डीसी अमरजीत सिंह ने बताया कि इस संदर्भ में इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया से अभी तक कोई निर्देश नहीं आए हैं। वैसे तो हमें लगता है कि तब तक शायद यह स्याही मतदाता की अंगुली से मिट जाए, लेकिन यदि फिर भी यदि यह नहीं मिटती है तो जो निर्देश चुनाव आयोग से आएंगे उसी के अनुरूप मतदान करवाया जाएगा

कुछ ऐसा है चुनावी स्याही का विज्ञान

चुनावी स्याही को बनाने के लिए सिलवर नाइट्रेट का इस्तेमाल होता है जो पानी से भी मिटता नहीं। सिल्वर नाइट्रेट हमारे शरीर में मौजूद नमक से मिलकर सिल्वर क्लोराइड बनाता है, जो काले रंग का होता है। इस स्याही का केमिकल रिएक्शन इतनी जल्दी होता है कि अंगुली पर लगने के एक सेकेंड के भीतर अपना निशान छोड़ देती है।

इलेक्शन की स्याही दो दिन से लेकर डेढ़ दो महीने तक त्वचा पर बनी रहती है। यह स्याही तभी उतरती है, जब त्वचा के सैल पुराने होने पर उतरने लगते हैं। इनसान के शरीर के तापमान और वातावरण के हिसाब से स्याही के मिटने का समय अलग-अलग हो सकता है।

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