हिमखबर डेस्क
हिमाचल प्रदेश में काला जादू में उपयोग होने वाले वन्य प्राणियों के अंगों की तस्करी के खिलाफ चंबा के वन विभाग उच्च स्तर पर स्ट्राइक की है। 15 से 18 दिन के भीतर विभाग ने तीन राज्यों के 10 तस्करों को सलाखों के पीछे पहुंचाया है।
तीसरे ऑपरेशन में कार्रवाई करने वालों के होश उस समय भी उड़ गए थे, क्योंकि तस्करों के कब्जे से कोबरा प्रजाति के जीवित सांप की भी बरामद किया गया था। ये साफ़ तौर पर माना जा सकता है कि जहां एक तरफ विभाग ने वन्यप्राणियों की सुरक्षा को लेकर कदम उठाया है वही दूसरी तरफ समाज में अंधविश्वास फैलाने वालों पर भी नकेल कसी है।
दिलचस्प ये भी है कि विभाग ने इस स्तर पर वन्य जीवों के अवशेषों की बरामदगी की है कि विभाग को प्रजातियों व संख्या को याद रखना भी मुश्किल हो रहा है। विभाग को ये कामयाबी 12 से 28 मई के बीच मिली है।
महाराष्ट्र, राजस्थान, पंजाब व हिमाचल के सीमांत इलाकों से वन्यजीवों के अंगों की तस्करी की जा रही थी। इसे बेचने के लिए चंबा सहित राज्य के अन्य हिस्सों में भी लाया जाता था। लंबे अरसे से गीदड़सिंघी, गोह, सर्प की खाल, कस्तूरी बिलाव, सांपों की खोपड़ियां, कछुए के खोल इत्यादि के अलावा अन्य वन्यजीवों के अंगों को बेचने का सिलसिला चल रहा था। अहम बात यह भी है कि दुर्लभ व शैडयूल -1 के वन्य प्राणियों के अवशेषों की तस्करी की जा रही थी।

वन विभाग के चंबा डिवीजन में दो मामलों का पर्दाफाश किया, जबकि डलहौजी डिवीजन में मंगलवार को एक अन्य गिरोह का पर्दाफाश किया। पड़ताल में ये खुलासा हुआ है कि पहले मामले में तस्करों ने वन्यजीवों को महाराष्ट्र में मारा था।
दूसरे मामले में राजस्थान व हिमाचल के सीमांत इलाके में शिकार किया गया था। पंजाब से भी अंगों की तस्करी की जाती थी। जांच में ये भी खुलासा हुआ है कि गिरोह के सदस्य एक जगह पर 4-5 दिन से ज्यादा नहीं रहते हैं।
हालांकि, स्पष्ट तौर पर नहीं कहा जा सकता, लेकिन ऐसा माना जा रहा है कि हिमाचल में वन विभाग का ये अपनी तरह का ये पहला ऑपरेशन होगा, जिसमें क्रमबद्ध तरीके से वन्यजीवों की तस्करी करने वालों को सलाखों के पीछे पहुंचाया गया है। माना ये भी जा रहा है कि गिरोह के ये सदस्य वन्य जीवों अंगों को बेचने के साथ-साथ स्थानीय वन्यजीवों का शिकार भी करते होंगे।
चंबा के मुख्य वन संरक्षक (सीसीएफ) अभिलाष दामोदरन ने कहा कि हमारी टीमें वन्यजीव तस्करी में शामिल लोगों को पकड़ने के लिए अथक प्रयास कर रही हैं। उन्होंने बताया कि तीन ऑपरेशन्स में वन्यजीवों के बहुमूल्य अंग बरामद हुए हैं। पहले मामले के सैंपल वन्यजीव संस्थान देहरादून भेजे गए हैं। दो मामलों के सैंपल भी जल्द ही जांच के भेजे जाएंगे।
सीसीएफ ने कहा कि नियमित गश्त के अलावा अंतरराज्जीय सीमाओं पर भी निगरानी बढ़ाई गई है। उन्होंने कहा कि विविध प्रकार के जानवरों की बरामदगी एक संगठित गिरोह की संलिप्तता की तरफ भी इशारा कर रही है। एक सवाल के जवाब में मुख्य वन संरक्षक ने माना कि बरामद वस्तुएं कथित तौर पर काला जादू के अनुष्ठानों में उपयोग की जाती हैं और ये बेशकीमती हैं, क्योंकि इन वस्तुओं की उपलब्धता मुश्किल होती है।
ऑपरेशन -3
विभाग को तीसरी सफलता 28 मई को डलहौजी शहर से 25 किमी दूर हिमाचल-पंजाब सीमा पर तुनूहट्टी वन चेक-पोस्ट पर मिली। गिरफ्तार व्यक्तियों के कब्जे से बड़ी मात्रा में जंगली जानवरों के शरीर के अवशेष जब्त किए गए। बड़ी बात यह भी है कि कोबरा प्रजाति के दो जिंदा सांप भी बरामद हुए हैं।
विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक गीदड़ सिंघी’, मॉनिटर लिज़र्ड के आठ जोड़े, 13 मॉनिटर लिज़र्ड के पंजे, सांपो की चार खोपड़ी, आठ सांप कशेरुक, 11 साही के पंख और एक फ्लैप शेल कछुए का एक खोल के अलावा सांप की खाल का एक डिब्बा, 49 सिवेट पंजे और दो जीवित सांप-एक चश्माधारी कोबरा और एक भारतीय रेत बोआ बरामद किया गया। 4 को गिरफ्तार किया गया।
ऑपरेशन -2
वन विभाग की टीम ने 15 मई को गिलहरी के सात पंजे, 278 गीदड़ सिंगी के अलावा अन्य जीवों के 90 से अधिक नाखून, सांप की त्वचा, कुछ हड्डियां, 50 मांस के टुकड़े व मॉनिटर लिजर्ड (गोह) के नौ पंजे बरामद किए थे। तस्करी में दो महाराष्ट्र ( पुणे) व चार राजस्थान के तस्करों को गिरफ्तार किया गया।
जांच में यह भी पता चला है कि आरोपित कुरियर के माध्यम से पुणे से भी वन्य जीवों के अंग मंगवाते थे। पूछताछ में पता चला कि पहले गिरोह के आरोपियों ने तीसा के नजदीक नकरोड़ में डेरा डाला था। यहां शिकार करते थे। निशानदेही के दौरान नकरोड़ में शिकार किए गए स्थान पर हड्डियां मिलीं। शिकार को फंसाने के लिए चिकन का इस्तेमाल किया गया था।
ऑपरेशन -1
तस्करी का भांडाफोड़ सबसे पहले 12 मई को हुआ था। वन विभाग की टीम ने पर्यटन स्थल खज्जियार में महाराष्ट्र के दो लोगों को वन्य प्राणियों के अवशेषों के साथ पकड़ा। ये सैलानियों और स्थानीय लोगों को मुंह मांगे दामों पर अवशेषों को बेच रहे थे। तस्करों के कब्जे से चार हत्था जोड़ी (जंगली बड़ी छिपकली) के अवशेष बरामद किए गए। इसके अलावा जंगली सुअर के दांत, कस्तूरी मृग की कस्तूरी सहित अन्य वन्य प्राणियों के अवशेष भी बरामद हुए।

