हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की सीक्रेसी ब्रांच में सामने आया चौैंका देने वाला मामला
शिमला – नितिश पठानियां
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में सीक्रेसी ब्रांच का एक नया कारनामा सामने आया है। दरअसल पिछले काफी समय से एमबीबीएस चौथे समेस्टर के छात्र उनके रिजल्ट को निकालने की मांग कर रहे थे। इस बारे में सरकार के सामने भी छात्रों ने रिजल्ट जारी करने की मांग उठाई थी।
उनका कहना था कि यूनिवर्सिटी प्रशासन तीन माह से रिजल्ट जारी नहीं कर रहा है। जब इस पूरे मामले की जांच की गई, तो यह सामने आया कि मेडिकल साइंस से जुड़े कालेजों में एमबीबीएस चौथे सेमेस्टर का जो सिलेबस पढ़ाया गया है, वह यूनिवर्सिटी की बोर्ड ऑफ स्टडी से अप्रूव ही नहीं था।
छात्रों ने नए सिलेबस के तहत एमबीबीएस में 2019 में एडमिशन लिया था और इस साल उनका अंतिम सेमेस्टर था। हैरानी इस बात कि है कि बिना अप्रूव किए ही सिलेबस पढ़ा दिया गया और एग्जाम भी करवा दिए गए। यह मामला जबसामने आया, तो सीक्रेसी ब्रांच की ओर से रिजल्ट भी रोका गया था।
ऐसे में जब यूनिवर्सिटी पर सरकार की ओर से दबाव बनाया गया, तो आनन-फानन में डीन ऑफ स्टडी की अध्यक्षता में बैठक बुलाई गई। इस बैठक में यह सामने आया है कि न केवल बिना अप्रूव किया सिलेबस छात्रों को पढ़ाया गया, बल्कि एग्जाम भी करवा दिए गए। इसमें एचपीयू के कर्मचारियों की बड़ी लापरवाही सामने आई है।
साथ ही साथ जिन शिक्षकों ने छात्रों को यह सिलेबस पढ़ाया, उसमें उनकी भी गलती पाई गई है। ऐसे में डीन ऑफ स्टडी की अध्यक्षता में हुई अकादमी काउंसिल की बैठक में यह निर्णय लिया गया है कि फिलहाल छात्रों को राहत देते हुए उनका रिजल्ट जारी किया जाएगा, लेकिन जो कर्मचारी इसमें जिम्मेदार पाए गए हैं, उन पर यूनिवर्सिटी प्रशासन कार्रवाई करेगा। इस बारे में अब वीसी को पूरी रिपोर्ट दी गई है और आगामी स्पष्टीकरण के लिए निर्णय लिया जाएगा।
गौर हो कि नए सिलेबस को बोर्ड ऑफ स्टडी, डीन कमेटी और सभी फैकल्टी मेंबर्स की कमेटी से अप्रूव करवाना जरूरी होता है। उसके बाद ही यह सिलेबस कालेज में पढ़ाया जा सकता है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ऐसे में इस पूरे मामले पर अब क्या कार्रवाई होती है, यह एचपीयू प्रशासन ही तय करेगा।

