मंडी, 31 अक्तूबर – अजय सूर्या
हिमाचल प्रदेश के मंडी जिला के एक दंपति ने अनूठी मिसाल पेश की है। दंपति ने पत्थर दिल बनकर अपने कलेजे के टुकड़े के शव का मोह छोड़कर उसकी देह को मेडिकल कॉलेज में रिसर्च के लिए दान कर दिया। दम्पति ने 16 साल के दिव्यांग बेटे का मौत के बाद उसका अंतिम संस्कार नहीं किया। इसके पीछे दम्पति की यह सोच थी कि भविष्य में किसी और के बच्चे के साथ ऐसा न हो।
दरअसल, मामला मंडी शहर के साथ लगते चडयारा गांव का है। 2007 में बलविंदर और मीनाक्षी के घर जन्मे “वंश” को जन्म के साथ ही कॉम्प्लिकेशन हो गई थी। हर जगह उपचार करवाने के बाद भी वंश की बीमारी का कोई पता नहीं चला। समय के साथ मालूम हुआ कि वंश न तो चल-फिर सकता है और न ही बोल सकता है। परिवार ने अपनी तरफ से वंश के पालन-पोषण में कोई कमी नहीं छोड़ी।


