सरदार पटेल विश्वविद्यालय में हुई भर्तियों की हो निष्पक्ष जांच : एनएसयूआई

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एनएसयूआई ने सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू से की मांग

मंडी – अजय सूर्या

पिछली भाजपा सरकार द्वारा मंडी में खोली गई सरदार पटेल विश्विद्यालय में हुई भर्तियां विवादो में है । लगातार इस विश्वविद्यालय में हुई भर्तियों की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई जा रही है तथा नियमो को ताक पर रखकर की गई भर्तियों को रद्द कर जल्द से जल्द उचित नियमो के तहत नई भर्तियां करने की भी मांग उठाई जा रही है ।

इसी बीच एनएसयूआई ने भी इन भर्तियों की जांच की मांग को लेकर आंदोलन तेज कर दिया है । एनएसयूआई एमएलएसएम महाविद्यालय इकाई ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से मांग की है कि जल्द से जल्द सरदार पटेल विश्वविद्यालय में हुई भर्तियों की निष्पक्ष जांच की जाए ।

एनएसयूआई के कैंपस अध्यक्ष अतुल ठाकुर व महासचिव अनित जसवाल ने प्रेस को जारी बयान में कहा कि पिछली भाजपा सरकार के समय सरदार पटेल विश्विद्यालय में हुई भर्तियों में फर्जीवाड़ा हुआ है और केवल एबीवीपी, आरएसएस और भाजपा की विचारधारा से संबंध रखने वाले व्यक्तियों को ही विश्वविद्यालयों में विभिन्न पदों पर नियुक्त किया गया है ।

इसी के साथ मंडी विश्विद्यालय में विभिन्न गैर सरकारी शिक्षण संस्थानों में कार्यरत कर्मचारियों को भेजा गया है जो कि विशेष विचारधारा से संबंध रखते है ।

उन्होंने कहा कि मंडी विश्वविद्यालय वर्तमान समय में एबीवीपी और आरएसएस का अड्डा बना हुआ है जिससे विश्विद्यालय प्रशासन के सभी कर्मचारी एक विशेष विचारधारा को तब्बजो दे रहे है और विश्विद्यालय की कार्यप्रणाली को खराब कर रहे है ।

उन्होंने कहा कि विश्विद्यालय में हुई भर्तियों में भाई भतीजावाद हुआ है तथा सभी पदों पर केवल राजनीतिक संरक्षण वाले व्यक्तियों को ही नियुक्त किया गया है जो कि पूर्ण रूप से गलत है ।

उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा सलेक्शन पैनल में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष को शामिल किया गया है। जिसने सरकार के साथ मिलीभगत करके एबीवीपी और आरएसएस के लोगो को विश्विद्यालय के विभिन्न पदों पर नियमो को दरकिनार कर एडजस्ट किया ।

उन्होंने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू जी से मांग की है कि इन भर्तियों की जल्द से जल्द जांच की जाए तथा जो भर्तियां नियमो को दरकिनार करके की गई है उनको तुरंत रद्द किया जाए ।

इनके स्थान पर या तो हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से कर्मचारियों को मंडी विश्वविद्यालय भेजा जाए या नियमो के तहत पुनः कर्मचारियों की विभिन्न पदों पर भर्ती की जाए ताकि विश्वविद्यालय की पारदर्शिता बनी रहे ।

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