शिमला के लिए भर्तियां स्थानांतरित कर सुक्खू ने अपनाया वीरभद्र का फार्मूला, जानें पूरा मामला

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शिमला – नितिश पठानियां 

राज्य लोक सेवा आयोग के लिए हमीरपुर से शिमला भर्तियां स्थानांतरित कर मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने पूर्व सीएम दिवंगत वीरभद्र सिंह का फार्मूला अपनाया है।

सत्ता में आने के बाद पिछली सरकारों में भी हमीरपुर से शिमला के लिए भर्तियां स्थानांतरित हुई थीं। राज्य कर्मचारी चयन आयोग हमीरपुर को उस वक्त राज्य अधीनस्थ सेवाएं चयन बोर्ड कहा जाता था।

तृतीय श्रेणी कर्मचारियों की भर्ती के लिए इस आयोग को छह अक्तूबर 1998 को अधिसूचित किया गया था। हमीरपुर स्थित यह आयोग अब खत्म हो चुका है। इसमें चल रहीं सभी भर्तियों को शिमला के लिए स्थानांतरित कर दिया गया है।

जिन पदों लिए भर्ती प्रक्रिया चल रही है, उनके लिए भर्ती अब शिमला में ही होगी। आगे की भर्तियां भी अब यहीं होनी हैं, जब तक नई एजेंसी को न खोल दिया जाए। पिछली कांग्रेस

सरकारों में भी इस आयोग की भर्तियों पर जांचें बैठती रही हैं। जब यह अधीनस्थ सेवाएं चयन बोर्ड था तो इसके एक अध्यक्ष पर तो कार्रवाई भी की जा चुकी है।

सीएम ने किसी राजनेता या अफसर का नहीं लिया नाम 

मंगलवार को सीएम सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने साफ-साफ किसी भी राजनेता या अफसर का नाम नहीं लिया कि इसकी जांच की जद में कौन-कौन लोग आने वाले हैं।

वह मंगलवार को इससे बचते रहे और कहा कि अभी जांच चल रही है तो सारी बातें बताई भी नहीं जा सकती हैं। हालांकि, आयोग के निलंबन के दौरान प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने राजनेताओं की संलिप्तता से भी इनकार नहीं किया था।

आयोग के गठन की 1998 की अधिसूचना रद्द 

मंगलवार को राज्य सरकार के कार्मिक विभाग ने आयोग को खत्म अथवा भंग करने की अधिसूचना जारी कर दी। इसके लिए छह अक्तूबर 1998 की इसके गठन की अधिसूचना को रद्द कर दिया गया। इसमें स्पष्ट किया गया कि सचिव शिक्षा और एडीजीपी विजिलेंस की रिपोर्टों को आधार बनाकर यह निर्णय जनहित में लिया गया है।

सुरेश कश्यप, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद के बोल 

कर्मचारी चयन आयोग हमीरपुर को भंग करना दुर्भाग्यपूर्ण निर्णय है। इस आयोग के साथ लाखों युवाओं के रोजगार का एक अवसर भी फिलहाल लंबे समय तक बंद हो गया है। यह तो वही बात होगी कि बीमारी का इलाज तो किया ही नहीं, बीमार का इलाज कर दिया।

हमीरपुर के एक मुख्यमंत्री ने खोला संस्थान, दूसरे ने करवा दिया बंद

जिला हमीरपुर से संबंध रखने वाले पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने 24 वर्ष पहले अपने कार्यकाल में हिमाचल प्रदेश अधीनस्थ सेवा कर्मचारी चयन आयोग की स्थापना की थी। इसका बड़ा लाभ निचले हिमाचल के बेरोजगार युवाओं को मिल रहा था।

पेपर लीक का मामला सामने आने के बाद अब हमीरपुर जिला से ही संबंध रखने वाले मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने इस आयोग को भंग करने की घोषणा कर दी है।

इस कदम से निचले हिमाचल के लाखों युवाओं को अब फिर से छंटनी परीक्षाओं के लिए राजधानी शिमला के चक्कर काटने पड़ेंगे।

साथ ही चयन आयोग में सेवारत कर्मचारियों को भी गृह जिला से बाहर जाना पड़ सकता है।

वहीं, मंगलवार को आदेश के बाद हमीरपुर स्थित चयन आयोग के कार्यालय में सन्नाटा पसर गया। आयोग के हमीरपुर दफ्तर में 60 कर्मचारी और अधिकारी काम करते हैं।

आयोग में चेयरमैन के अलावा सदस्य भी हैं, जिनकी नियुक्तियां पूर्व की भाजपा सरकार के कार्यकाल में हुई हैं।

उल्लेखनीय है कि 10 अक्तूबर 1998 को प्रदेश की तत्कालीन धूमल सरकार ने हिमाचल अधीनस्थ सेवाएं कर्मचारी चयन आयोग नाम से इसकी स्थापना की थी।

वर्ष 2016 में इसका नाम बदलकर हिमाचल कर्मचारी चयन आयोग कर दिया गया। शुरुआत में यहां एक चेयरमैन के अलावा सदस्य के दो पद थे। वर्ष 2012 में आयोग के सदस्यों की संख्या दो से बढ़ाकर 4 कर दी गई।

चिटों पर भर्तियां करने के मामले में भी सुर्खियों में रहा आयोग

वर्ष 2003-04 में भी तत्कालीन वीरभद्र सिंह की अगुवाई वाली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में इस संस्थान में विजिलेंस का छापा पड़ा था। उस समय चिटों पर भर्तियां करने का मामला खासा सुर्खियों में रहा।

इस मामले में तत्कालीन चेयरमैन एसएम कटवाल समेत कई लोगों को न्यायालय से सजा भी हुई। अब फिर से प्रदेश में कांग्रेस सरकार बनने पर यह संस्थान खासी चर्चा में है।

विजिलेंस ने जेओए आईटी पेपर लीक मामले में आयोग की वरिष्ठ सहायक उमा आजाद समेत आठ लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर गत सोमवार को ही हमीरपुर न्यायालय में चालान पेश किया है।

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