हे भगवान मुझे क्यों अभयदान दिया, परिवार, खेत-खलिहान और घर सब दिया उजाड़
सिरमौर – नरेश कुमार राधे
हे परमात्मा, मुझे क्यों अभयदान दिया, मैं तो घर से कुछ पल के लिए ही निकला था। लौटा तो मेरे दो मासूम बच्चे, माता-पिता व पत्नी छिन चुके थे। ये व्यथा सिरमौरी ताल में बादल फटने की घटना में सुरक्षित बचे ‘विनोद कुमार’ की है।
मूसलाधार बारिश हो रही थी। विनोद घर से निकल कर पड़ोस तक गया था। वो क्यों गया था, इसको लेकर दो अलग-अलग बातें सामने आ रही हैं।
- एक के मुताबिक वो मामा की बेटी व बच्चों को सुरक्षित जगह पर छोड़ने गया था।
- दूसरी बात के मुताबिक वो नजदीक रहने वाले लोगों को अपने घर सुरक्षित जगह पर लाना चाहता था, क्योंकि विनोद के घर के नजदीक नाला नहीं आता था, जबकि पड़ोसियों के घर के समीप से नाला गुजरता था।
खैर, घर से निकलने का कारण कुछ भी रहा हो, लेकिन ये तय है कि कुदरत ने विनोद को अभयदान दिया। एक तरफ परिवार छीन लिया तो खेत-खलियानों सहित मकान भी छिन गया। विनोद के पिता कुलदीप ने उसे फोन भी किया था। लेकिन जब तक घर से निकलते, तब तक सैलाब आ चुका था।
करीब 34 वर्षीय विनोद की आंखें पथरा गई हैं। वो रो भी नहीं रहा था। भीतर से शायद ये सवाल कुदरत से पूछ रहा होगा कि जब सबको ही छीनना था तो मेेरे प्राणों की रक्षा क्यों की। वहीं अगर प्रशासनिक अधिकारी की मानें तो परिवार दाहिने हाथ की और महज 30-40 फीट ही चला जाता तो प्राणों की रक्षा हो सकती थी।

हर कोई विनोद की स्थिति को देखकर गमगीन हो रहा था। इस बात का अंदाजा तक नहीं लगाया जा सकता, कि उस व्यक्ति पर क्या गुजर रही होगी जिसने चंद मिनट पहले ही परिवार को नजदीक के घर में जाकर लौट आने की बात कही थी। लौटा तो तबाही का मंजर देखकर सिहर उठा।
एक जानकारी के मुताबिक तबाही के दौरान विनोद महज 100 मीटर की दूरी पर ही था। लौटा तो न ही घर था और गौशाला भी मलबे में दफन हो गई थी। परिवार के एक भी सदस्य की आवाज नहीं सुन रही थी। खामोशी व सन्नाटा चारों तरफ पसर चुका था।

अंधेरे में विनोद ग्रामीणों के साथ मलबे के ढेर में अपनों को तलाश रहा था, लेकिन कौन कहां है, इस बात का उसे पता नहीं चल पाया। पूरी रात पथराई आंखों से जागकर गुजारी तो वीरवार सुबह 12 बजे के आसपास 8 वर्षीय बेटी दीपिका व 62 वर्षीय पिता कुलदीप सिंह के शवों को मलबे में तलाश लिया गया। 10 साल का बेटा अपनी मां के साथ अब भी लापता है। साथ ही 55 वर्षीय मां जीतो देवी का भी कुछ नहीं पता।

