
शिमला – जसपाल ठाकुर
स्थान विनियामक आयोग की अदालत ने इसमें कई खामियां मिलने पर यह फैसला सुनाया। उच्च शिक्षा निदेशालय और हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) को इस संस्थान को दी गई संबद्धता खत्म करने के निर्देश दिए हैं।
आयोग के अध्यक्ष मेजर जनरल सेवानिवृत्त अतुल कौशिक की अदालत में संस्थान से जुड़े मामलों की अंतिम सुनवाई हुई। अदालत ने पाया कि बीएससी एचएमसीएस कोर्स की संस्थान ने अधिक फीस ली है, जबकि फीस ढांचा मंजूर नहीं करवाया गया।
विद्यार्थियों को यह नहीं बताया कि इस कोर्स के तहत उन्हें डिस्टेंस एजूकेशन के तहत दाखिले दिए हैं। विद्यार्थियों से फीस रेगुलर कोर्स की लेकर डिग्री डिस्टेंस एजूकेशन की दी।
इसकी भी संस्थान के पास मंजूरी नहीं थी। एक साथ दो वर्ष के लिए इस संस्थान ने एचपीयू और तमिलनाडु के मदुरई कामराज विश्वविद्यालय से मान्यता ली। मद्रास हाईकोर्ट के अंतिम फैसले पर दाखिले निर्भर होने की जानकारी से भी विद्यार्थियों को अवगत नहीं करवाया।
अदालत ने कहा कि इस संस्थान को चालू रखना विद्यार्थियों के हित में नहीं है। ऐसे में इसकी संबद्धता समाप्त कर इसे बंद किया जाए। अदालत ने संस्थान संचालकों को निर्देश दिए कि मद्रास हाईकोर्ट के निर्देशानुसार विद्यार्थियों को मदुरई कामराज विवि से डीएमसी और डिग्रियां दी जाएं।
बता दें कि कुछ माह पूर्व आयोग ने संस्थान पर 25 लाख रुपये जुर्माना लगाया था।
विद्यार्थियों को अन्य संस्थानों में दिए जाएंगे दाखिले
आयोग ने एचपीयू के रजिस्ट्रार को उक्त संस्थान के विद्यार्थियों को अन्य संस्थानों में दाखिले लेने में मदद करने के लिए कहा है। चालू सत्र की परीक्षाओं के बाद विद्यार्थियों को अन्य संस्थानों में माइग्रेट किया जाएगा।
एचपीयू को संस्थानों के रिकॉर्ड जांचने के निर्देश
आयोग ने एचपीयू को निजी कॉलेजों और निजी शिक्षण संस्थानों के लिए मंजूर कोर्स, फीस ढांचा और मान्यता दस्तावेज जांचने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने संस्थानों को समय पर सभी मंजूरियां लेने के आदेश भी दिए हैं।
