हिमाचल प्रदेश के लोगों को सुप्रीम राहत, निजी भूमि पर सूखे-गले खैर कटान पर रोक नहीं

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हिमखबर डेस्क 

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि हिमाचल प्रदेश में निजी भूमि पर सूखे, गिरे, फफूंदग्रस्त और सड़े हुए खैर के पेड़ों की कटाई पर प्रतिबंध नहीं है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने वीरवार को यह टिप्पणी की।

पीठ ने कहा कि वर्ष 1996 में राज्य के पहाड़ी क्षेत्रों में पेड़ों की कटाई पर लगाया प्रतिबंध पहले ही 16 फरवरी 2018 और 10 मई 2023 के आदेशों के जरिये संशोधित किया जा चुका है, जिनमें खैर के पेड़ों की कटाई की अनुमति दी गई थी।

मामले में नियुक्त न्याय मित्र के परमेश्वर ने बताया कि हाईकोर्ट ने यह कहते हुए हस्तक्षेप से इन्कार कर दिया था कि मामला शीर्ष अदालत में है।

याचिकाकर्ताओं ने पहले जिला वन अधिकारी से सूखे पेड़ काटने की अनुमति मांगी थी, लेकिन अनुमति न मिलने पर हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।

पीठ ने राज्य सरकार को 10 मई 2023 के आदेश का पालन करते हुए समिति गठित करने का निर्देश दिया, जिससे ऐसी कटाई की अनुमति संबंधी मामलों का निपटारा किया जा सके। एजेंसी

पेड़ों की कटाई का ठेका निजी एजेंसियों को न दिया जाए

उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में निर्देश दिया था कि खैर के पेड़ों की कटाई सीधे वन विभाग या हिमाचल प्रदेश राज्य वन निगम की ओर से की जाए और इसे निजी एजेंसियों को ठेके पर न दिया जाए।

साथ ही प्रत्येक क्षेत्र की कटाई से पहले, दौरान और बाद में वीडियोग्राफी सुनिश्चित करने व कम से कम 25 प्रतिशत परिपक्व खैर के पेड़ों को ‘मदर ट्री’ के रूप में सुरक्षित रखने का निर्देश भी दिया गया था।

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