
शिमला- जसपाल ठाकुर
हिमाचल प्रदेश सरकार आउटसोर्स कर्मियों को बड़ी राहत देने की तैयारी कर रही है। जल शक्ति मंत्री महेंद्र ठाकुर के मुताबिक सरकार ने नीति निर्धारित करने का फैसला लिया है। उन्होंने इस संबंध में सभी सरकारी विभाग के प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, बोर्डों, निगमों के प्रबंध निदेशकों को पत्र लिखा है।
इस पत्र में साफ तौर पर लिखा है कि हिमाचल प्रदेश में जो भी सरकार से अनुमोदित कंपनी के माध्यम से आउटसोर्स कर्मी लगे हैं, उनके लिए नीति निर्धारित करने का निर्णय लिया है। मंत्री ने अधिकारियों से इन कर्मियों का पूरा ब्योरा तलब किया है।
इनमें उन्हें एक सप्ताह के अंदर सूचना देनी होगी कि आउटसोर्स पर कितने कर्मचारी नियुक्त हैं। इसे उन्हें नियुक्ति से संबंधित एमओयू, एग्रीमेंट भी देना होगा। अगर नीति बनी तो ऐसे कर्मियों को बड़ा लाभ पहुंचेगा और इनका कंपनियों के हाथों शोषण नहीं हो करेगा।
नीति की सुगबुगाहट से बढ़ सकता है आंकड़ा
प्रदेश में आउटसोर्स कर्मचारी कितने हैं, इसकी असल संख्या पर विवाद रहा है। लेकिन अब नीति बनाने की सुगबुगाहट से इसकी संख्या बढ़ सकती है। मंत्री के निर्देश के बाद से विभागों, निगमों से सही आंकड़ा सामने आ सकेगा। वैसे अभी तक इनकी संख्या 30 हजार से अधिक बताई जा रही है।
पूर्व सरकार की नीयत पर उठाए सवाल
वर्तमान सरकार ने आउटसोर्स कर्मियों को लेकर पूर्व कांग्रेस सरकार की नीयत पर सवाल उठा चुकी है। आरोप है कि विधानसभा चुनाव से पूर्व तत्कालीन सरकार ने नीति बनाने का छलावा किया। नीति नहीं बनाई। अब बारी भाजपा सरकार की है। तब भी कानूनी अड़चनों का तर्क दिया गया था। इसकी सरकार क्या काट निकालती है, यह देखना दिलचस्प होगा।
कई बार उठा मामला
यह मुद्दा विधानसभा में कई बार उठा। कई विधायकों ने कंपनियों, ठेकेदारों को लाभ देने का भी आरोप लगाया, पर कोई समाधान होता दिखाई नहीं दिया।
जेसीसी में भी उठेगा मुद्दा
संयुक्त समन्वय समिति (जेसीसी) की 27 नवंबर को होने वाली बैठक में भी यह मुद्दा उठेगा। अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष अश्वनी ठाकुर ने इसकी पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि इस हजारों कर्मियों की रोजी रोटी से जुड़ा मसला है। उम्मीद है कि सरकार इस पर बड़ा ऐलान करेगी।
