
दिल्ली- नवीन गुलेरिया
सुप्रीम कोर्ट ने एक्सीडेंट क्लेम बेनेफिट को लेकर एक अहम फैसला देते हुए कहा है कि अगर इंश्योरेंस पॉलिसी के प्रीमियम का भुगतान तय समय में न हुआ हो, तो एक्सीडेंट क्लेम बेनेफिट नहीं मिलेगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मौजूदा मामले में प्रीमियम पेमेंट की डेट बीत चुकी थी और जिस दिन एक्सीडेंट हुआ उस दिन पॉलिसी लैप्स थी, क्योंकि तय तारीख पर प्रीमियम का भुगतान नहीं किया गया।
एक्सीडेंट के बाद प्रीमियम का भुगतान हुआ और घटना के बारे में एलआईसी को जानकारी भी नहीं दी गई और गलत इरादे से यह जानकारी छुपाई गई। ऐसे में एक्सीडेंट क्लेम का दावा रिजेक्ट होना चाहिए और एक्सीडेंट क्लेम का दावा खारिज कर दिया। दरअसल, प्रदीप कुमार नामक शख्स ने एलआईसी से जीवन सुरक्षा योजना पॉलिसी 14 अक्तूबर, 2011 को ली।
इसके तहत 3.75 लाख रुपए बीमा रकम थी और एक्सिडेंट डेथ के केस में अतिरिक्त 3.75 लाख रकम भुगतान का करार था। छह महीने में किश्त का भुगतान करना था।अगली किस्त 14 अक्तूबर, 2011 को देना था, लेकिन किस्त का भुगतान नहीं किया गया और इस तरह से किस्त भुगतान में डिफाल्ट हुआ। इसके बाद छह मार्च, 2012 को प्रदीप कुमार का एक्सीडेंट हुआ और बाद में 21 मार्च, 2012 को उनकी मौत हो गई। लेकिन एक्सीडेंट के बाद ही नौ मार्च, 2012 को उनकी तरफ से बकाए प्रीमियम का भुगतान कर दिया गया।
एलआईसी ने शिकायती के पति की मौत के बाद शिकायती को बीमा रकम तीन लाख 75 हजार रुपए का भुगतान कर दिया, लेकिन एक्सीडेंट बेनेफिट का दावा रिजेक्ट कर दिया और कहा कि जिस तारीख यानी छह मार्च, 2011 को एक्सीडेंट हुआ था, उस तारीख को प्रीमियम भुगतान न किए जाने के कारण पॉलिसी लैप्स कंडीशन में थी। इसके बाद मृतक की पत्नी ने जिला उपभोक्ता अदालत का दरवाजा खटखटाया।
जिला उपभोक्ता अदालत ने एलआईसी को निर्देश दिया कि वह एक्सीडेंट दावा का भी भुगतान करे। मामला स्टेट कंज्यूमर फोरम में गया और वहां एलआईसी की दलील स्वीकार कर ली गई, जिसके बाद शिकायती ने नेशनल कंज्यूमर फोरम का दरवाजा खटखटाया और नेशनल कंज्यूमर फोरम ने जिला फोरम के आदेश को बरकरार रखा और एलआईसी की अर्जी खारिज कर दी और एक्सीडेंट बेनेफिट के भुगतान का आदेश दिया, लेकिन इस फैसले के एलआईसी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
