संसार छोड़ा, पर दुनिया देखेगी निशा की आंखें

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नालागढ़ से महिला को लेकर पीजीआई गए परिजनों की सहमति पर ऑगर्न ट्रांसप्लाट

शिमला – जसपाल ठाकुर

नालागढ़ निवासी निशा ठाकुर की आंखे मरने के बाद भी दुनिया को देख सकेंगी, वहीं उनके द्वारा दान किए गए अंगों से कई लोगों को जीवन मिला है। नालागढ़ की दत्तोवाल निवासी निशा ठाकुर के अंग मरने के बाद पीजीआई में जरूरतमंदोंं को दान किए गए।

पीजीआई के चिकित्सकों ने यह अंग जरूरत मंद को रोगियों को लगा भी दिए हंै। निशा ठाकुर के परिवार द्वारा अंग दान किए जाने बारे लिया गए निर्णय की हर जगह सराहना हो रही है।

जानकारी अनुसार नालागढ़ के दतोवाल की निशा ठाकुर (61) को 11 जुलाई को अचानक पैरा लाइसिस का अटैक पड़ा, जिससे उसके परिजन उसे नालागढ़ के एक निजी अस्पताल में ले गए । जहां उसकी हालत नाजुक होने पर पीजीआई रैफर कर दिया गया।

पीजीआई पहुंचते ही चिकित्सकों ने बताया कि निशा ठाकुर का ब्रैन डेड हो गया है और उसे किसी तरह से बचाया नहीं जा सकता। अगर वह उसके अंग को दान देना चाहते है, तो वह किसी जरूरतमंद रोगी के काम आ जाएंगे। इस पर उनके पति यशपाल ठाकुर ने अंग देने के लिए हामी भर दी।

चिकित्सकों द्वारा उन्हें आईसीयू में रखा गया। 14 जुलाई को चिकित्सकों ने उनके शरीर से किडनी, लीवर और आंखे निकाल ली और यहां पर जरूरतमंदों को लगा दी। अंग दान के बाद जैसे ही उन्हें आपरेशन थिएटर से बाहर लाया जा रहा था तो लोगों ने सम्मान पूर्वक उनके शव पर पुष्प अर्पित किए।

नालागढ़ में इस कार्य के लिए इस परिवार की सराहना की जा रही है। निशा ठाकुर का शुक्रवार को नालागढ़ में अंतिम संस्कार किया गया।

एडवोकेट रविंद्र ठाकुर ने कहा कि उनकी भाभी निशा ठाकुर का पैरालाइसिस अटैक के बाद ब्रेन डैड हो गया था। देहदान करने वाले नालागढ़ निवासी नरेंद्र सिंह ने कहा कि निशा ठाकुर की तरह अन्य लोगों को भी अपने अंग दान करने चाहिए, ताकि जरूरतमंदों को जीवन मिल सके।

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