शाहपुर बोह घाटी त्रासदी: 24 घंटे बाद भी दहशत, गढ़गून-भंगार गांव मिटे, अब स्पैड़ा पर मंडरा रहा मौत का खतरा

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शाहपुर-नितीश पठानियां 

मलबा, टूटी दीवारें और उजड़े आशियाने। कांगड़ा जिले के शाहपुर की बोह घाटी में बादल फटने के बाद केलंग नाले का रौद्र रूप देख गांव के लोग 24 घंटे बाद भी सहमे हुए हैं।

गढ़गून और भंगार गांव जमींदोज हो चुके हैं। पहाड़ अब भी दरक रहा है। स्पैड़ा गांव पर खतरा बना हुआ है। प्रशासन ने एहतियातन तीनों गांव खाली करवा दिए हैं।

तीनों गांवों के 38 परिवार बेघर हैं। 160 लोगों को बोह के सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल में बनाए राहत शिविर में ठहराया गया है। कुछ परिवार अपने रिश्तेदारों के घरों में रह रहे हैं।

गढ़गून गांव तक पहुंचना किसी चुनौती से कम नहीं। कई किलोमीटर पैदल चलने के बाद गांव की सीमा शुरू होती है। लेकिन गांव नजर नहीं आता। वहां सिर्फ पत्थरों, पेड़ों और मलबे का ढेर दिखाई देता है।

जिन आंगनों में कभी बच्चों की आवाजें गूंजती थीं, वहां अब सन्नाटा पसरा है। सैलाब ने गांव के 12 मकानों को पूरी तरह मिट्टी में मिला दिया है।

सरकारी प्राथमिक स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र भी बह गए हैं। खेत, पेयजल योजनाएं, बिजली के खंभे और गांव को जोड़ने वाला रास्ता तबाह हो चुका है। दर्जनों पशु मारे गए हैं।

गढ़गून के साथ लगा भंगार गांव भी इस त्रासदी से अछूता नहीं बचा। यहां तीन परिवारों के मकान पूरी तरह रहने योग्य नहीं रहे। घरों के भीतर रखा सामान, अनाज, दस्तावेज मलबे के नीचे दब गए।

स्पैड़ा गांव के करीब 12 घर मलबे की चपेट में आ चुके हैं जबकि 11 अन्य मकानों को आंशिक नुकसान पहुंचा है। करीब 27 परिवारों वाले इस गांव के लोग अब अपने घरों से दूर राहत शिविरों और रिश्तेदारों के यहां शरण लेने को मजबूर हैं।

हर किसी की निगाह पहाड़ी की ओर टिकी है कि कहीं फिर से मलबा न आ जाए। राहत शिविर में भोजन और ठहरने की व्यवस्था तो है, लेकिन जिन लोगों ने अपना घर, खेत और पशुधन खो दिया है, उनके चेहरों पर भविष्य की चिंता साफ दिखाई देती है।

आपदा की मार सिर्फ तीन गांवों तक सीमित नहीं। लाम गांव में भी जमीन दरकने लगी है। 60 घरों वाले इस गांव में 50 मकानों में दरारें पड़ चुकी हैं, जबकि छह मकान पूरी तरह असुरक्षित हो गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जमीन फट रही है। लोग रातें जागकर बिता रहे हैं।

डीसी भी पहुंचे पैदल, बोले-गढ़गून में एक भी मकान नहीं बचा

बुधवार शाम डीसी हेमराज बैरवा करीब पांच किलोमीटर पैदल चल गढ़गून गांव पहुंचे। उन्होंने नुकसान का जायजा लेने के बाद कहा कि गांव में एक भी मकान सुरक्षित नहीं बचा है।

प्रशासन ने तीनों गांव खाली करवा दिए हैं और प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया गया है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को नुकसान का विस्तृत आकलन कर शीघ्र रिपोर्ट देने के निर्देश दिए।

हर परिवार को 50 हजार की दी राहत

डीसी हेमराज बैरवा ने बताया कि प्रत्येक प्रभावित परिवार को 50 हजार की फौरी राहत दी जा रही है। जिन परिवारों के मकान पूरी तरह ध्वस्त हुए हैं, उन्हें एक लाख तक की सहायता मिलेगी। बेघर परिवारों को किराये के लिए प्रतिमाह पांच हजार रुपये भी दिए जाएंगे।

वीडियो कॉल पर सीएम ने प्रभावितों से की बात, बोले दोबारा बसाएगी सरकार

बोह घाटी में बादल फटने से प्रभावित परिवारों को सरकार सुरक्षित स्थान पर दोबारा बसाएगी। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने बुधवार को शिमला से वीडियो कॉल पर आपदा प्रभावितों से बातचीत कर उन्हें हरसंभव सहायता और शीघ्र पुनर्वास का भरोसा दिया।

मुख्यमंत्री ने डीसी कांगड़ा हेमराज बैरवा को प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की प्रक्रिया तत्काल शुरू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सप्ताहांत में वह स्वयं बोह पंचायत के आपदाग्रस्त क्षेत्रों का दौरा करेंगे।

सबसे अधिक प्रभावित गढ़गून गांव के लोगों ने मुख्यमंत्री को बताया कि उनके घरों के साथ वर्षों की जमा पूंजी भी बह गई। कई परिवारों के पास तन पर पहने कपड़ों के अलावा कुछ नहीं बचा। उन्होंने सरकार से नए मकान बनाकर देने की मांग की।

बोह के वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में बनाए गए राहत शिविर में रह रहे सपेड़ा और  लाम गांव के प्रभावितों ने भी मुख्यमंत्री से बातचीत कर शीघ्र पुनर्वास की गुहार लगाई।

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