
हमीरपुर- अनिल कपलेश
प्रदेश में अवैध फैक्टरियों में बनने वाली जहरीली शराब से हुई मौतों के बाद पुलिस और एक्साइज डिपार्टमेंट पिछले कुछ दिनों से काफी चुस्त-दुरुस्त हो गए हैं। इस मामले में संलिप्त कई आरोपियों को पकड़ा भी गया है और उन सभी लोगों से पूछताछ का दौर जारी है, जिनका किसी न किसी रूप में इस मामले से लिंक जुड़ रहा है।
इस सारे मामले में कुछ ऐसे लोग भी चपेट में आ रहे हैं जो यह कहते हैं कि उनका इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है और उनके नाम का गलत इस्तेमाल कर उन्हें फंसाया गया है। पुलिस और एक्साइज डिपार्टमेंट की शक की ऐसी ही सूई घूमी है रंगस के एक मेडिकल स्टोर संचालक पर।
इस पर आरोप लगे हैं कि हमीरपुर में पकड़ी गई अवैध शराब की फैक्टरी में जो स्पिरिट (इथाइल) बरामद हुआ था वो उनके जीएसटी नंबर पर खरीदा गया था। हालांकि दुकान मालिक की मानें तो उन्हें इसकी कोई खबर नहीं है। यह मेडिकल स्टोर स्वरूप चंद के नाम पर है। उनके पिता पुन्नू राम की मानें तो उन्हें पिछले दिनों जब उन्हें पुलिस ने पूछताछ के लिए सुंदरनगर बुलाया तो उन्हें पता चला कि जो स्पिरिट महाराष्ट्र की फर्म से यहां लाया जाता था उसकी खरीद के लिए उनके मेडिकल स्टोर का जीएसटी नंबर इस्तेमाल किया गया था।
पुन्नू राम के अनुसार उन्होंने अपना जीएसटी नंबर और मोबाइल नंबर नियमानुसार दुकान के बाहर बोर्ड पर लिख रखा है। हालांकि वे कहते हैं कि वे इस मामले की शिकायत लेकर नादौन पुलिस थाना में भी गए थे कि जो लोग दोषी हैं उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए, लेकिन अभी तक केस दर्ज नहीं किया गया।
राज्यकर एवं आबकारी उपायुक्त विशाल गोरला ने बताया कि जीएसटी एक्ट के अनुसार हर दुकानदार को अपना जीएसटी नंबर दुकान के बाहर डिसप्ले करना होता है। यदि वो ऐसा न करे तो उसे फाइन का प्रावधान है। ऐसे जीएसटी नंबर के दुरुपयोग की संभावना भी रहती है, जिसमें विभाग आरोपी पर कार्रवाई कर सकता है। इसमें संबंधित व्यक्ति को खुद थाने में जाकर या ई-मेल के माध्यम से एफआईआर दर्ज करवाए जाने की आवश्यकता है।
